नेशनल डेस्क: खरगोन जिले के बड़वाह नगर में एक्वाडक्ट पुल के आसपास बीते तीन दिनों में करीब 250 तोतों की अचानक मौत से इलाके में हड़कंप मच गया है। बड़ी संख्या में पक्षियों के मरने की सूचना जब जिला प्रशासन को मिली तो मामला भोपाल तक पहुंच गया। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर पशु चिकित्सा एवं डेयरी विभाग की वरिष्ठ टीम मौके पर पहुंची।
गुरुवार सुबह विभाग के उपसंचालक जीएस सोलंकी बड़वाह पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने स्थानीय पशु चिकित्सकों के साथ बैठक कर पूरे मामले की जानकारी ली। शुरुआती जांच के बाद उपसंचालक सोलंकी ने बताया कि यह मामला बर्ड फ्लू या किसी अन्य संक्रामक बीमारी से जुड़ा नहीं लग रहा है। प्रारंभिक तौर पर तोतों की मौत का कारण फूड पॉइजनिंग यानी विषाक्त भोजन माना जा रहा है।
पोस्टमार्टम में मिले विषाक्त भोजन के संकेत
पशु चिकित्सक डॉ. मनीषा चौहान ने जानकारी दी कि मृत तोतों के पोस्टमार्टम में फूड पॉइजनिंग के स्पष्ट लक्षण पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि कई बार लोग पक्षियों को ऐसा खाना डाल देते हैं, जो उनके पाचन तंत्र के लिए नुकसानदायक होता है। इसके अलावा खेतों में कीटनाशक छिड़काव के बाद वहां पड़े दाने चुगने से भी पक्षियों की जान जा सकती है। हालांकि मामले की पुष्टि के लिए मृत पक्षियों के विसरा सैंपल भोपाल और जबलपुर की प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम कारण स्पष्ट हो सकेगा। एहतियात के तौर पर आसपास के सभी पोल्ट्री फार्मों की भी जांच की गई, जहां किसी भी तरह के बर्ड फ्लू के लक्षण नहीं मिले हैं।
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वन विभाग की लापरवाही पर नाराजगी
निरीक्षण के दौरान उपसंचालक सोलंकी ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पुल के आसपास लोगों को पक्षियों को दाना डालने से रोकने के लिए पहले ही वनकर्मियों की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए थी। इस संबंध में एसडीओ से बातचीत की गई, लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं रहा। मौके पर निरीक्षण के दौरान यह भी देखा गया कि पुल के आसपास बांस और अन्य पेड़ों पर अब भी कई मृत तोतों के शव लटके हुए हैं। हालांकि जमीन पर कोई नया मृत पक्षी नहीं मिला, जिससे यह संकेत मिला कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है।
चावल डालने पर रोक
उपसंचालक ने स्थानीय पशु चिकित्सक डॉ. जितेंद्र सैते और उनकी टीम को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। पशु चिकित्सक डॉ. सुरेश बघेल ने बताया कि निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि लोग अब भी पुल की रेलिंग पर चावल और अन्य खाद्य सामग्री डाल रहे थे, जिसे तत्काल हटाया गया। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि कुछ दिनों तक पक्षियों को दाना न डालें। यदि कोई दाना डालना चाहता है तो केवल साफ ज्वार या बाजरा ही डाले, चावल बिल्कुल न डालें।
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अब रोज सुबह होगी निगरानी
फॉरेस्ट रेंजर निशांत जोशी ने बताया कि वन विभाग के कर्मचारी लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रहे हैं और नगर पालिका द्वारा सफाई कार्य भी कराया गया है। आगे ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए सुबह 6 बजे से 8 बजे तक पुल क्षेत्र में वनकर्मियों की स्थाई ड्यूटी लगाई जाएगी। साथ ही लोगों को जागरूक किया जाएगा कि वे पक्षियों के लिए सुरक्षित भोजन ही डालें।
प्रशासन का कहना है कि विसरा रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले पर अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक किया जाएगा।
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