नई दिल्ली। दिल्ली दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इन पर UAPA के तहत केस चलता रहेगा। यह मामला साल 2020 में हुए दिल्ली दंगों से जुड़ा है, जिसमें कई लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे।
शरजील इमाम और उमर खालिद को नहीं मिली जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दो प्रमुख आरोपियों शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि इन दोनों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। हालांकि, दिल्ली दंगों के अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अभी सुनवाई जारी है।
सात आरोपियों ने मांगी थी जमानत
दिल्ली दंगों के इस मामले में कुल सात आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत की मांग की थी। इनमें शामिल हैं गुलफिशा फातिमा, शरजील इमाम, मीरान हैदर, उमर खालिद, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद शकील खान, शादाब अहमद थे। इनमें से शरजील इमाम और उमर खालिद को जमानत देने से कोर्ट ने इनकार कर दिया है, जबकि बाकी आरोपियों पर फैसला अभी आना बाकी है।
UAPA के तहत हुई थी गिरफ्तारी
साल 2020 में दिल्ली में भड़के दंगों के मामले में सभी आरोपियों को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था। इस कानून के तहत जमानत मिलना काफी मुश्किल माना जाता है।
पहले भी खारिज हो चुकी है जमानत याचिका
यह पहली बार नहीं है जब आरोपियों की जमानत याचिका खारिज हुई हो। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट इनकी जमानत याचिकाओं को खारिज कर चुका है। इसके अलावा, 2 सितंबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी सभी आरोपियों को जमानत देने से मना कर दिया था।
10 दिसंबर 2025 को सुरक्षित रखा गया था फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर 2025 को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब कोर्ट ने उस पर निर्णय देते हुए दो आरोपियों को जमानत से इनकार कर दिया है।
आरोपियों का क्या कहना है?
आरोपियों का कहना है कि वे पिछले 5 साल से जेल में बंद हैं। उनका दावा है कि उनके खिलाफ दिल्ली में दंगा भड़काने से जुड़े कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए हैं। उनका यह भी कहना है कि लंबे समय से ट्रायल पूरा न होना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
CAA और NRC विरोध से जुड़ा है मामला
सभी आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ और सांप्रदायिक भाषण दिए थे। इन्हीं भाषणों के कारण हालात बिगड़े और दिल्ली में बड़े पैमाने पर दंगे भड़क गए।
दिल्ली दंगों में हुआ था भारी नुकसान
साल 2020 में हुए दिल्ली दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में 15 हिंदू भी शामिल थे। 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस हिंसा ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
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