नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में 7.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने के साथ मजबूत वृद्धि दर्ज कर सकती है, जो राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के 7.4 प्रतिशत अनुमान से थोड़ा अधिक है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है। एसबीआई के आíथक अनुसंधान विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई और एनएसओ के अनुमानों के बीच ऐतिहासिक तौर पर 0.20-0.30 प्रतिशत अंक का अंतर होता है, लिहाजा 7.4 प्रतिशत का वृद्धि अनुमान अपेक्षित और तर्कसंगत है।
रिपोर्ट के मुताबिक, हमारा मानना है कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि लगभग 7.5 प्रतिशत रहेगी और इसमें ऊपर जाने का झुकाव बना हुआ है। द्वितीय अग्रिम अनुमान, जिसमें अतिरिक्त डाटा और संशोधन शामिल होंगे, 27 फरवरी 2026 को जारी किए जाएंगे। 2022-23 को आधार वर्ष के रूप में संशोधित किए जाने से ये सभी आंकड़े बदल सकते हैं। एसबीआई रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2025 के अंत तक राजकोषीय घाटा 9.8 लाख करोड़ रुपए यानी बजट अनुमान का 62.3 प्रतिशत था।
रिपोर्ट कहती है, हालांकि कर राजस्व बजट अनुमान से कम रह सकता है लेकिन गैर-कर राजस्व के अधिक होने की संभावना है। ऐसा होने से कुल प्राप्तियों पर अधिक असर नहीं होगा। कुल व्यय भी अपेक्षाकृत कम रहने के कारण राजकोषीय घाटा 15.85 लाख करोड़ रुपए रह सकता है, जो 15.69 लाख करोड़ रुपए के बजट अनुमान के करीब है। रिपोर्ट के मुताबिक, नए जीडीपी आंकड़ों के आने पर देश का राजकोषीय घाटा जीडीपी के प्रतिशत के रूप में 4.4 प्रतिशत पर अपरिवíतत रहने की संभावना है।
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