Stock Market Updates: भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह के पहले दिन सोमवार, 12 जनवरी को कमजोर शुरुआत की। लगातार बने नकारात्मक माहौल के बीच शुरुआती कारोबार में निवेशकों की सतर्कता साफ नजर आई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स करीब 250 अंकों की गिरावट के साथ 83,433 के स्तर पर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी नुकसान में कारोबार करता दिखा। बैंकिंग शेयरों पर दबाव के चलते निफ्टी बैंक भी लाल निशान में रहा।

बाजार पर क्यों बना है दबाव?
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, घरेलू कारणों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी.के. विजयकुमार का कहना है कि मौजूदा समय में बाजार बेहद संवेदनशील स्थिति में है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता, अमेरिकी राष्ट्रपति की बयानबाज़ी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों का सीधा असर बाजार की धारणा पर पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि ईरान और वेनेजुएला से जुड़ी घटनाएं, साथ ही ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के रुख ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसका नतीजा यह हुआ है कि इंडिया VIX यानी वोलैटिलिटी इंडेक्स में तेज उछाल देखने को मिल रहा है, जो आने वाले दिनों में बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव का संकेत देता है।
निवेशकों की नजर किन फैक्टर्स पर?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप टैरिफ से जुड़ा फैसला अभी लंबित है और कभी भी सामने आ सकता है। इसके अलावा, भारत में Q3 कंपनियों के नतीजे, खासतौर पर आईटी, बैंकिंग सेक्टर और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी दिग्गज कंपनियों की मैनेजमेंट कमेंट्री शॉर्ट टर्म में बाजार की दिशा तय कर सकती है।
एशियाई बाजारों का मिला-जुला रुख
जहां भारतीय बाजार दबाव में दिखे, वहीं एशियाई बाजारों ने हफ्ते की शुरुआत सकारात्मक नोट पर की। ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 अच्छी बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। दक्षिण कोरिया के कोस्पी और कोसडैक इंडेक्स में भी मजबूती दिखी। हालांकि, जापान में नेशनल हॉलीडे के कारण वहां के बाजार बंद रहे।
अमेरिकी बाजारों की मजबूत क्लोजिंग
पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी शेयर बाजारों ने शानदार प्रदर्शन किया। शुक्रवार को S&P 500, नैस्डेक और डॉव जोन्स तीनों इंडेक्स रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुए। टेक्नोलॉजी और ब्लूचिप शेयरों में खरीदारी से अमेरिकी बाजारों को मजबूती मिली, जिसका असर ग्लोबल सेंटिमेंट पर भी देखा जा रहा है।
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डॉलर और रुपये की चाल
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में हल्की कमजोरी देखने को मिली और यह एक महीने के उच्च स्तर से फिसलकर नीचे आया। वहीं, भारतीय रुपया भी पिछले सत्र में डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ था, जिससे आयात-निर्यात से जुड़ी कंपनियों को कुछ राहत मिल सकती है।
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कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में फिलहाल बड़ी हलचल नहीं दिखी। निवेशकों की नजर ईरान और वेनेजुएला से तेल सप्लाई पर बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में WTI और ब्रेंट क्रूड दोनों ही सीमित दायरे में कारोबार करते नजर आए।