Last Updated: October 9, 2026

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Shattila Ekadashi Vrat: साल की पहली एकादशी… जानें पूजा विधि, नियम और पारण का शुभ समय

January 14, 2026

Shattila Ekadashi Vrat: साल की पहली एकादशी… जानें पूजा विधि, नियम और पारण का शुभ समय

Shattila Ekadashi Vrat 2026: सनातन धर्म में एकादशी तिथि को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। प्रत्येक मास के कृष्ण और शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है, जिसका धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम से किया गया व्रत जीवन के कष्टों को दूर करता है और अक्षय पुण्य प्रदान करता है। आइए जानते हैं षटतिला एकादशी 2026 की तिथि, पूजा विधि, नियम और पारण का सही समय…

षटतिला एकादशी 2026: तिथि और पारण का समय

माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 13 जनवरी 2026 को दोपहर 3:17 बजे से हो रही है और इसका समापन 14 जनवरी 2026 को शाम 5:52 बजे होगा।
इस व्रत का पारण 15 जनवरी 2026, गुरुवार को प्रातः 7:15 बजे से 9:21 बजे के बीच करना शुभ माना गया है।

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षटतिला एकादशी की पूजा विधि

–इस पावन व्रत के लिए प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मन को शुद्ध रखें।

–घर के पूजा स्थल पर चौकी रखकर उस पर पीला वस्त्र बिछाएं।

–भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

–पीले पुष्प, चंदन, केसर, फल, मिठाई, घी का दीपक और धूप अर्पित करें।

–इसके बाद षटतिला एकादशी व्रत कथा का पाठ करें या श्रवण करें।

–पूजा के अंत में श्रीहरि की आरती अवश्य करें।

–पूरे दिन संयम और नियमों के साथ व्रत का पालन करें और अगले दिन शुभ मुहूर्त में पारण करें।

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षटतिला एकादशी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, षटतिला एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे महान पुण्य की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इस व्रत का फल अश्वमेध यज्ञ के समान होता है।
इस दिन भगवान विष्णु को तिल से बने भोग अर्पित करने और तिल व गुड़ का दान करने से विशेष पुण्य मिलता है। यह व्रत सुख-समृद्धि, सौभाग्य और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. दैनिक सवेरा टाइम्स इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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