Last Updated: September 24, 2026

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सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर को लगाई फटकार, जानें क्या है पूरा मामला

February 6, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर को लगाई फटकार, जानें क्या है पूरा मामला

नेशनल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि चुनाव हारने के बाद अदालत का सहारा नहीं लेना चाहिए। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि जब जनता किसी नेता या पार्टी को नकार देती है, तो अदालत का मंच लोकप्रियता हासिल करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। यह टिप्पणी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर दायर की गई एक याचिका की सुनवाई के दौरान की गई।

मामला क्या था?
प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका में मांग की गई थी कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को रद्द घोषित किया जाए। याचिका में आरोप लगाया गया था कि चुनाव से ठीक पहले महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं के बैंक खातों में पैसे भेजे गए जिससे मतदाताओं पर असर पड़ा और चुनाव निष्पक्ष नहीं रहा।

चुनाव आयोग ने पहले ही सुनवाई से किया था इनकार
इस मामले को पहले चुनाव आयोग के सामने भी उठाया गया था, लेकिन आयोग ने इस पर सुनवाई करने से मना कर दिया था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

किस बेंच ने की सुनवाई?
इस याचिका पर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने की।

कोर्ट ने नोटिस जारी करने से किया इनकार
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा “हम इस याचिका पर नोटिस जारी नहीं कर सकते।” कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव याचिकाएं आमतौर पर किसी एक सीट या उम्मीदवार से जुड़ी होती हैं। लेकिन यहां पूरी विधानसभा चुनाव प्रक्रिया को ही रद्द करने की मांग की गई है। जो कानूनी रूप से सही तरीका नहीं है।

 

CJI ने क्या कहा?
जब जन सुराज पार्टी की ओर से वकील ने कहा कि मामला बहुत गंभीर है और कोर्ट को दखल देना चाहिए, तब मुख्य न्यायाधीश ने सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा, चुनाव हारने के बाद अदालत का सहारा न लें। आपकी पार्टी को कितने वोट मिले? जब जनता आपको नकार देती है, तो अदालत का इस्तेमाल लोकप्रियता पाने के लिए नहीं होना चाहिए। CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई चाहे तो किसी योजना को अदालत में चुनौती दे सकता है। लेकिन यहां मुख्य मांग पूरे चुनाव को रद्द करने की है, जो सही प्रक्रिया नहीं है।

बिहार चुनाव में क्या हुआ था?

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मतदान की तारीखें थीं

-6 नवंबर 2025

-11 नवंबर 2025

याचिका में कहा गया कि 26 सितंबर 2025 से महिला रोजगार योजना के पैसे महिलाओं के खातों में आने शुरू हो गए थे। अक्टूबर में भी कई किश्तों में पैसे भेजे गए। इससे चुनाव प्रभावित हुआ। इस मुद्दे पर पहले आरजेडी (RJD) ने भी चुनाव आयोग में शिकायत की थी और योजना पर रोक लगाने की मांग की थी।

कोर्ट का साफ संदेश
सुप्रीम कोर्ट का रुख इस मामले में साफ दिखा। चुनाव परिणाम से असहमति अलग बात है। लेकिन पूरे चुनाव को रद्द करवाने के लिए मजबूत कानूनी आधार जरूरी है। अदालत राजनीति का मंच नहीं है।

 

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