Last Updated: September 23, 2026

Dainik Savera Times Logo

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का महत्व, जानिए समय और विधि

February 11, 2026

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का महत्व, जानिए समय और विधि

Mahashivratri Char Prahar Puja 2026: महाशिवरात्रि को भगवान शिव की आराधना का सबसे पावन पर्व माना जाता है। ‘महाशिवरात्रि’ अर्थात शिव की महान रात्रि। यह पर्व विशेष रूप से रात में मनाया जाता है, इसलिए इस दिन रात्रि को चार भागों में विभाजित कर प्रत्येक प्रहर में पूजा करने की परंपरा है। हालांकि अधिकतर लोग केवल प्रदोष काल में पूजा करते हैं, लेकिन शास्त्रों में पूरी रात चारों प्रहर में शिव उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से कष्टों का नाश होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

क्या है चार प्रहर की पूजा?

रात को चार समान हिस्सों में बांटा जाता है, जिन्हें ‘प्रहर’ कहा जाता है। महाशिवरात्रि की रात्रि में हर प्रहर में शिवलिंग का अलग-अलग प्रकार से अभिषेक और पूजन किया जाता है। इसे ही ‘चार प्रहर की पूजा’ कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि पूरी रात जागकर भगवान शिव का स्मरण करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

ये भी पढ़ें : असम फाइनल वोटर लिस्ट 2026 जारी: जानें क्यों हटाए गए नाम और कैसे कर सकते हैं चेक?

महाशिवरात्रि 2026: चार प्रहर के पूजन का समय

प्रथम प्रहर: शाम 06:11 बजे से रात 09:23 बजे तक
द्वितीय प्रहर: रात 09:23 बजे से 16 फरवरी को 12:35 बजे तक
तृतीय प्रहर: रात्रि 12:35 बजे से 03:47 बजे तक
चतुर्थ प्रहर: प्रातः 03:47 बजे से 06:59 बजे तक

भक्त अपनी सुविधा और श्रद्धा अनुसार सभी प्रहरों में या किसी एक प्रहर में भी पूजा कर सकते हैं।

चार प्रहर पूजा की विधि

चारों प्रहर में शिवलिंग का अभिषेक और पूजन किया जाता है। विधि सरल है, लेकिन श्रद्धा और नियम का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

प्रथम प्रहर:
जल और दूध से शिवलिंग का अभिषेक करें। साथ ही ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करें।

द्वितीय प्रहर:
दही, शहद या पंचामृत से अभिषेक किया जा सकता है।

तृतीय प्रहर:
घी या पुनः दूध से अभिषेक करें और शिव मंत्रों का जाप करें।

चतुर्थ प्रहर:
अंतिम प्रहर में शुद्ध जल से अभिषेक कर भगवान शिव की विधिवत आरती करें।

ये भी देखें : सुनील शर्मा को पहले माफी मांगनी चाहिए : उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी

प्रत्येक प्रहर में बेलपत्र अर्पित करना, दीपक जलाना और फल चढ़ाना शुभ माना जाता है। अंतिम प्रहर के बाद प्रसाद वितरित करें।

क्यों की जाती है चार प्रहर पूजा?

पौराणिक कथाओं के अनुसार महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव विशेष रूप से जागृत अवस्था में अपने भक्तों की प्रार्थनाएं सुनते हैं। ऐसी मान्यता है कि पूरी श्रद्धा से चारों प्रहर में पूजा करने पर मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से यह साधना मन को शांत, केंद्रित और शुद्ध करने में सहायक मानी जाती है।

अस्वीकरण: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। इसका वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें