नेशनल डेस्क। देहरादून के अर्जुन हत्याकांड मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जहां, एक ऐसे परिवार की दुखद कहानी है, पैसे और प्रॉपर्टी के विवाद ने मां-बेटे के रिश्ते को ही खत्म कर दिया। आरोप है कि संपत्ति के झगड़े ने मां को इतना कठोर बना दिया कि उसने अपने ही बेटे की हत्या की साजिश रच डाली। अर्जुन शर्मा के पिता कर्नल रमेश चंद्र शर्मा 38 वर्ष की उम्र में देश सेवा के दौरान शहीद हो गए थे। उनके बलिदान के बाद केंद्र सरकार ने उनकी पत्नी बीना शर्मा को आजीविका चलाने के लिए एक गैस एजेंसी आवंटित की थी। समय के साथ यह गैस एजेंसी और उससे जुड़ी जमीन परिवार की मुख्य संपत्ति बन गई। यह संपत्ति अर्जुन शर्मा और उनकी मां बीना शर्मा के नाम पर थी।
गैस एजेंसी और जमीन को लेकर मां और बेटे के बीच मतभेद शुरू हो गए। धीरे-धीरे यह विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों के रिश्तों में दूरी आ गई। मामला कोर्ट और पुलिस तक पहुंच गया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें और मुकदमे दर्ज कराए। बीना शर्मा ने अपने बेटे से खतरा बताते हुए उच्च न्यायालय से सुरक्षा की मांग की। अदालत के आदेश पर उनकी सुरक्षा में एक महिला पुलिसकर्मी तैनात की गई। इसके बाद अर्जुन अपनी मां से अलग होकर वसंत विहार में किराए के मकान में रहने लगे।
पुराने रिश्ते और पैसों का लेन-देन
बीना शर्मा का अपने पुराने परिचित विनोद उनियाल से पिछले 15-20 सालों से करीबी संबंध था। आरोप है कि बीना शर्मा ने करोड़ों रुपये विनोद उनियाल के खातों में ट्रांसफर किए। इसी बीच जीएमएस रोड स्थित संपत्ति को बेचने के लिए डॉ. अजय खन्ना के साथ 14 करोड़ रुपये की डील तय हुई। इस सौदे में से 8 करोड़ रुपये बीना शर्मा को मिल चुके थे। बताया जा रहा है कि यह रकम भी विनोद उनियाल के खाते में ट्रांसफर कर दी गई।
कोर्ट में टल रहा था मामला
अर्जुन शर्मा ने इस संपत्ति की बिक्री के खिलाफ अदालत से स्टे (रोक) ले लिया। इस कारण डॉ. अजय खन्ना को संपत्ति पर कब्जा नहीं मिल सका, जबकि वे करोड़ों रुपये दे चुके थे। इससे वे काफी परेशान थे और अपने पैसे वापस मांग रहे थे। इसी बात को लेकर बीना शर्मा और अर्जुन के बीच झगड़े बढ़ते गए। पैसे और संपत्ति के इस विवाद ने हालात को और ज्यादा बिगाड़ दिया।
हत्या की रची साजिश
आरोप है कि बीना शर्मा, विनोद उनियाल और डॉ. अजय खन्ना ने मिलकर अर्जुन शर्मा को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। इस साजिश के तहत ग्राम देवीखाल, पोस्ट गुमखाल, कोटद्वार जिला पौड़ी गढ़वाल निवासी पंकज राणा और उसके भाई राजीव राणा को 12 लाख रुपये में हायर किया गया। बताया गया कि पंकज राणा, विनोद उनियाल के यहां ड्राइवर का काम करता था, जबकि राजीव राणा ऑटो चलाता था। दोनों भाई इस समय चक्खुवाला कोतवाली क्षेत्र में रह रहे थे। सौदे के तहत 12 लाख रुपये तय हुए, जिसमें से 3 लाख रुपये एडवांस दिए गए थे और बाकी रकम काम पूरा होने के बाद देने की बात तय हुई थी।
रिश्तों का हुआ दर्दनाक अंत
यह पूरा मामला दिखाता है कि जब परिवार में भरोसा खत्म हो जाता है और लालच हावी हो जाता है, तो रिश्ते भी टूट जाते हैं। मां-बेटे का रिश्ता, जो सबसे पवित्र माना जाता है, संपत्ति के विवाद में उलझकर एक दर्दनाक अंजाम तक पहुंच गया।