तल्हासी (अमरीका) : अंतरिक्ष में जाना मानव शरीर के लिए चुनौतीपूर्ण होता है और एक नए अध्ययन में पाया गया है कि अंतरिक्ष यात्र के बाद मस्तिष्क खोपड़ी के भीतर ऊपर और पीछे की ओर खिसकता है तथा उसका आकार भी कुछ हद तक बदल जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, जो लोग अधिक समय तक अंतरिक्ष में रहे, उनमें ये बदलाव अधिक स्पष्ट थे। नासा की लंबी अंतरिक्ष यात्रओं की योजनाओं और पेशेवर अंतरिक्ष यात्रियों से आगे आम लोगों तक अंतरिक्ष यात्र के विस्तार के मद्देनजर ये निष्कर्ष अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण शरीर और मस्तिष्क के द्रवों को नीचे की ओर खींचता है। अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण के अभाव में शरीर के द्रव सिर की ओर खिसकते हैं और अंतरिक्ष यात्रियों का चेहरा सूजा हुआ दिखाई देता है। सामान्य गुरुत्वाकर्षण में मस्तिष्क, मस्तिष्कमेरु (सेरेब्रोस्पाइनल) द्रव और आसपास के ऊतक संतुलन की स्थिति में रहते हैं, लेकिन सूक्ष्म गुरुत्व (माइक्रोग्रैविटी) में यह संतुलन बदल जाता है। गुरुत्वाकर्षण के अभाव में मस्तिष्क खोपड़ी के भीतर तैरने लगता है और आसपास के मुलायम ऊतकों तथा स्वयं खोपड़ी से विभिन्न प्रकार के दबावों का सामना करता है।
पहले के अध्ययनों में पाया गया था कि अंतरिक्ष यात्र के बाद मस्तिष्क खोपड़ी में ऊपर की ओर स्थित दिखाई देता है, लेकिन अधिकांश शोध औसत या पूरे मस्तिष्क के माप पर केंद्रित थे, जिससे अलग-अलग हिस्सों में होने वाले सूक्ष्म बदलाव छिप सकते हैं। शोध दल ने 26 अंतरिक्ष यात्रियों के मस्तिष्क के एमआरआई स्कैन का वेिषण किया, जिन्होंने कुछ सप्ताह से लेकर 1 वर्ष से अधिक समय अंतरिक्ष में बिताया था। अंतरिक्ष यात्र से पहले और बाद के स्कैन की तुलना करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति की खोपड़ी को आधार बनाकर संरेखण किया गया।
मस्तिष्क को एक इकाई के रूप में देखने के बजाय उसे 100 से अधिक हिस्सों में विभाजित कर प्रत्येक क्षेत्र में हुए बदलाव को अलग-अलग मापा गया। इससे वे पैटर्न सामने आए जो पूरे मस्तिष्क के औसत वेिषण में दिखाई नहीं देते थे। अध्ययन में पाया गया कि अंतरिक्ष यात्र के बाद मस्तिष्क लगातार ऊपर और पीछे की ओर खिसकता है। अंतरिक्ष में बिताया गया समय जितना अधिक था, बदलाव भी उतना ही अधिक था। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर लगभग 1 वर्ष बिताने वाले अंतरिक्ष यात्रियों में मस्तिष्क के ऊपरी हिस्से के कुछ क्षेत्र दो मिलीमीटर से अधिक ऊपर खिसक गए, जबकि अन्य हिस्सों में अपेक्षाकृत कम बदलाव देखा गया।
शोधकर्ताओं के अनुसार, खोपड़ी जैसी सीमित जगह में यह दूरी भी महत्वपूर्ण है। अधिकतर बदलाव पृथ्वी पर लौटने के 6 महीने के भीतर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट आए। हालांकि पीछे की ओर हुआ खिसकाव अपेक्षाकृत कम सुधरा, संभवत: इसलिए कि पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण नीचे की ओर खींचता है, आगे की ओर नहीं।