नेशनल डेस्क: राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने कहा है कि भारत और फ्रांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मामले में अमेरिका या चीन के मॉडल पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहते। उनका कहना है कि दोनों देशों के साथ-साथ यूरोप की भी यही सोच है कि AI के क्षेत्र में रणनीतिक स्वायत्तता यानी अपनी स्वतंत्र और संतुलित व्यवस्था विकसित की जाए।
फ्रांस के राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत, फ्रांस और पूरे यूरोप का लक्ष्य ऐसा व्यापक और संतुलित AI मॉडल तैयार करना है, जो किसी एक देश या कंपनी पर पूरी तरह निर्भर न हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक के इस दौर में आंख मूंदकर किसी एक वैश्विक ताकत पर भरोसा करना सही रणनीति नहीं है।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब दुनिया भर में AI को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है और कुछ बड़े देश और कंपनियां इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। मैक्रों का मानना है कि भारत, फ्रांस और यूरोपीय देशों को मिलकर ऐसा ढांचा तैयार करना चाहिए, जिसमें तकनीकी संप्रभुता और डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
#WATCH | Delhi: French President Emmanuel Macron says, “…I really believe that we have the same obsession both in India and France, I would say, and in Europe, which is that we don’t want to be dependent on a totally US or a totally Chinese model, but we really believe that we… pic.twitter.com/wLzc4Tlepp
— ANI (@ANI) February 18, 2026
AI में आत्मनिर्भरता पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार करना जरूरी है। इसमें अपने डेटा सेंटर बनाना, पर्याप्त कंप्यूटिंग क्षमता विकसित करना, युवाओं और विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करना और इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाना शामिल है। उनके मुताबिक AI की असली ताकत तीन चीजों पर टिकी है कंप्यूटिंग क्षमता, प्रतिभा और पूंजी।
मैक्रों ने यह भी स्वीकार किया कि फिलहाल AI की दौड़ में अमेरिका और चीन आगे हैं, जबकि भारत और फ्रांस उनसे पीछे हैं। हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देशों के पास कई मजबूत संसाधन और संभावनाएं हैं और वे इस प्रतिस्पर्धा में बने हुए हैं। उनका कहना है कि सही रणनीति और सहयोग से भारत, फ्रांस और यूरोप AI के क्षेत्र में मजबूत और स्वतंत्र पहचान बना सकते हैं।