
भारतीय सिनेमा में लंबे समय तक पुरुष प्रधान कहानियों और भव्य बजट वाली फिल्मों का बोलबाला रहा, लेकिन पिछले कुछ सालों में महिला प्रधान फिल्में अपनी अलग पहचान बनाने लगी हैं। ये फिल्में न केवल दर्शकों को मनोरंजन देती हैं, बल्कि सामाजिक संदेश और मजबूत कथानक के कारण भी चर्चा में रहती हैं।
तापसी पन्नू ऐसे ही अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिन्होंने लगातार महिला केंद्रित फिल्मों के जरिए अपनी एक्टिंग और सामाजिक दृष्टिकोण का दम दिखाया है। उनकी नई फिल्म ‘अस्सी’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है, जो उनके महिला प्रधान किरदारों की लंबी सूची में एक और महत्वपूर्ण कदम है।
तापसी पन्नू की कुछ यादगार महिला प्रधान फिल्में:
बदला (2019) – ओटीटी पर भी चर्चा में रही, जिसमें तापसी अपने प्रेमी के मर्डर केस में फंसी और अपनी निर्दोषता साबित करने की जंग लड़ती हैं। IMDb रेटिंग: 7.7।
पिंक (2016) – महिलाओं की मर्जी और समाज की संकीर्ण धारणाओं पर सवाल उठाई। फिल्म के डायलॉग “नो मींस नो” ने गहरी छाप छोड़ी।
थप्पड़ (2020) – घरेलू हिंसा और महिला सम्मान के मुद्दों को उजागर करती फिल्म। केवल ‘एक थप्पड़’ से रिश्तों और अधिकारों पर सवाल उठाया गया। बॉक्स ऑफिस कलेक्शन: 44 करोड़ से ज्यादा।
सांड की आंख (2019) – साठ साल की दो बहनों की निशानेबाजी की कहानी। फिल्म ने पितृसत्तात्मक और रुढ़िवादी सोच को पर्दे पर बखूबी दिखाया।
रश्मि रॉकेट (2021) – भारतीय महिला खिलाड़ियों के संघर्ष पर आधारित। जेंडर टेस्टिंग और भेदभाव जैसे मुद्दों को सामने लाया।
इसके अलावा तापसी ने ‘हसीन दिलरुबा’, ‘ब्लर’, ‘शाबाश मिठू’, और ‘नाम शबाना’ जैसी फिल्मों में भी महिलाओं के सशक्त किरदार निभाकर दर्शकों और आलोचकों दोनों का ध्यान खींचा है।
तापसी पन्नू की ये फिल्में यह साबित करती हैं कि महिला प्रधान सिनेमा सिर्फ दर्शकों को मनोरंजन नहीं देता, बल्कि समाज की सोच में बदलाव लाने की क्षमता भी रखता है।