Last Updated: September 21, 2026

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कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच बाजार लाल निशान में, आईटी सेक्टर ने बढ़ाया दबाव

February 24, 2026

कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच बाजार लाल निशान में, आईटी सेक्टर ने बढ़ाया दबाव

अमेरिकी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत पर दिखा और बाजार गिरावट के साथ खुला।

Bombay Stock Exchange का सेंसेक्स 242 अंकों की गिरावट के साथ 83,053 पर खुला और शुरुआती कारोबार में करीब 500 अंक फिसलकर 82,725.30 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। वहीं National Stock Exchange of India का निफ्टी अपने पिछले बंद 25,713 से 71 अंक गिरकर 25,641.80 पर खुला।

सुबह करीब 9:30 बजे तक सेंसेक्स 557.14 अंक यानी 0.67 प्रतिशत गिरकर 82,737.52 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि निफ्टी 154.20 अंक (0.60 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ 25,558.80 पर था। इस दौरान निफ्टी के सभी सेक्टर इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखे।

व्यापक बाजार में भी दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.72 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.88 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह बीएसई मिडकैप 150 इंडेक्स 0.5 प्रतिशत और स्मॉलकैप 250 इंडेक्स 0.6 प्रतिशत कमजोर रहे।

सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा, जहां 3.34 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा ऑटो, एफएमसीजी और बैंकिंग सेक्टर में भी हल्की कमजोरी देखी गई।

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 25 में गिरावट रही। गिरने वाले प्रमुख शेयरों में HCLTech, Infosys, Tata Consultancy Services, Bharti Airtel और Tech Mahindra शामिल रहे। वहीं State Bank of India, Asian Paints, Axis Bank, Power Grid Corporation of India, Tata Steel और Kotak Mahindra Bank में बढ़त दर्ज की गई।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कारोबारी सत्र में निफ्टी ने करीब 100 अंकों की बढ़त के साथ गैप-अप ओपनिंग दी थी, जिससे तेजी का माहौल बना था, लेकिन वैश्विक संकेत कमजोर रहने से आज दबाव दिखा।

तकनीकी स्तर पर 25,850–25,900 का दायरा निफ्टी के लिए मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है, जबकि 25,550–25,600 का स्तर सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है।

संस्थागत निवेश के मोर्चे पर, दो सत्रों की लगातार बिकवाली के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 23 फरवरी को वापसी करते हुए 3,843 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जिससे वे इस महीने के लिए नेट खरीदार बन गए। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 1,292 करोड़ रुपये की बिकवाली की।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को फिलहाल सतर्क और चयनात्मक रणनीति अपनानी चाहिए। गिरावट के दौरान मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देना बेहतर रहेगा और आक्रामक खरीदारी से बचना चाहिए।

निफ्टी में 26,000 के ऊपर टिकाऊ ब्रेकआउट मिलने के बाद ही बाजार में नई मजबूत खरीदारी का संकेत मिल सकता है। तब तक जोखिम प्रबंधन के साथ स्टॉक-विशेष रणनीति अपनाना अधिक सुरक्षित माना जा रहा है।

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