Last Updated: September 22, 2026

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‘नेहरू कॉम्प्रोमाइज्ड थे, हमेशा ऐसे काम करते थे जैसे…’, AI समिट विवाद पर BJP ने कांग्रेस की आलोचना की

February 26, 2026

‘नेहरू कॉम्प्रोमाइज्ड थे, हमेशा ऐसे काम करते थे जैसे…’, AI समिट विवाद पर BJP ने कांग्रेस की आलोचना की

नेशनल डेस्क: नई दिल्ली में AI समिट और भारत-अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समझौते के मामले में “कॉम्प्रोमाइज़्ड” यानी समझौता करने वाली स्थिति में थे। इसके जवाब में बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर तीखा हमला बोला।

नेहरू पर क्या आरोप लगाए गए?

संबित पात्रा ने कहा कि असली “कॉम्प्रोमाइज़” अगर किसी ने किया था, तो वह पंडित जवाहरलाल नेहरू थे। उन्होंने नेहरू को “कॉम्प्रोमाइज़्ड चाचा” कहते हुए आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में विदेशी एजेंसियों का प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) पर प्रभाव था।

पात्रा के मुताबिक

नेहरू के पूर्व प्राइवेट सेक्रेटरी एम.ओ. मथाई को “अमेरिकन एजेंट” कहा जाता था। 1960 के दशक में सोवियत खुफिया एजेंसी KGB के एजेंट भी प्रधानमंत्री कार्यालय में मौजूद थे। उस समय यह माना जाता था कि संवेदनशील सरकारी दस्तावेज अमेरिका और सोवियत संघ तक आसानी से पहुंच जाते थे। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर राष्ट्रीय सुरक्षा को इतना कमजोर क्यों किया गया कि गोपनीय दस्तावेज विदेशी ताकतों तक पहुंच सके। जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री थे और उन्होंने 1947 से 1964 तक देश का नेतृत्व किया। पात्रा ने उनके कार्यकाल से जुड़े कई पुराने मुद्दों को उठाते हुए कांग्रेस पर जवाब देने का दबाव बनाया।

 

ग्वादर पोर्ट का मुद्दा

पात्रा ने 1958 का एक पुराना मामला भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि उस समय ओमान के सुल्तान ने ग्वादर पोर्ट भारत को देने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन नेहरू ने इसे स्वीकार नहीं किया। ग्वादर पोर्ट आज पाकिस्तान में स्थित है और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का अहम हिस्सा माना जाता है। पात्रा का कहना है कि अगर उस समय भारत ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया होता, तो आज इसकी सामरिक (स्ट्रेटेजिक) स्थिति भारत के लिए फायदेमंद होती। उनके अनुसार, नेहरू के उस फैसले का असर आज भारत को भुगतना पड़ रहा है।

जमीन और विदेशी दबाव को लेकर सवाल

संबित पात्रा ने यह भी सवाल उठाया कि नेहरू ने कथित तौर पर भारत की कुछ जमीन दूसरे देशों को देने की बात क्यों की। उन्होंने यह अंदेशा जताया कि क्या उन फैसलों के पीछे कोई विदेशी दबाव या बाहरी प्रभाव था। उन्होंने कांग्रेस की मौजूदा नेतृत्व से इन सवालों पर जवाब देने की मांग की।

 

AI समिट पर नया आरोप

AI इम्पैक्ट समिट को लेकर भी बीजेपी ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। पात्रा ने दावा किया कि सोशल मीडिया पर कई लोगों ने पोस्ट और रील शेयर कर बताया है कि उन्हें कांग्रेस दफ्तर या वरिष्ठ नेताओं की ओर से मैसेज मिले। इन मैसेज में कथित तौर पर कहा गया कि अगर वे वर्ल्ड AI समिट के खिलाफ ट्वीट या वीडियो बनाएंगे, तो उन्हें 25,000 रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये तक दिए जाएंगे। पात्रा ने कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जिनमें कथित मैसेज भी दिखाए गए हैं।

कुल मिलाकर क्या है मामला?

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर समझौते का आरोप लगाया। बीजेपी ने पलटवार करते हुए नेहरू के कार्यकाल पर सवाल उठाए। राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेशी एजेंसियों का प्रभाव और ग्वादर पोर्ट जैसे मुद्दे चर्चा में आए। AI समिट को लेकर सोशल मीडिया पर पैसे देकर कंटेंट पोस्ट कराने के आरोप भी लगाए गए। इस पूरे विवाद से साफ है कि AI समिट और अंतरराष्ट्रीय समझौतों का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन गया है, जिसमें दोनों दल एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

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