Last Updated: September 21, 2026

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भारत की अर्थव्यवस्था 2026-27 में मजबूती की ओर, GDP वृद्धि दर 6.8-7.2% की उम्मीद

February 26, 2026

भारत की अर्थव्यवस्था 2026-27 में मजबूती की ओर, GDP वृद्धि दर 6.8-7.2% की उम्मीद

EY India की ताजा रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक विकास दर 6.8 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते और अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे आर्थिक सुधार इस वृद्धि को समर्थन देंगे।

ईवाई इंडिया के चीफ पॉलिसी एडवाइजर D.K. Srivastava का कहना है कि वैश्विक आर्थिक समूहों और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत के व्यापार समझौते मध्यम अवधि में विकास की संभावनाओं को मजबूत कर रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार के दीर्घकालिक ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य को हासिल करने के लिए कर-से-जीडीपी अनुपात में लगातार सुधार जरूरी होगा। यह सुधार बड़े नए कर ढांचे लाने के बजाय बेहतर कर अनुपालन के जरिए संभव माना गया है, क्योंकि अधिकांश प्रमुख कर सुधार पहले ही लागू किए जा चुके हैं।

ईवाई की इकोनॉमी वॉच रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में व्यक्तिगत आयकर और जीएसटी ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए, जिनका उद्देश्य लोगों की खर्च योग्य आय बढ़ाना और निजी उपभोग को मजबूत करना था। हालांकि, इन कदमों का असर सरकारी राजस्व पर भी पड़ा है, जिससे वित्त वर्ष 2025-26 में आय बजट अनुमान से कम रहने की आशंका व्यक्त की गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि राजस्व पर दबाव के बावजूद सरकार वित्त वर्ष 2025-26 के लिए तय राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को बनाए रखने में सक्षम रह सकती है।

केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.3 प्रतिशत तक लाने का अनुमान जताया है। सरकार आर्थिक विकास और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से राजकोषीय अनुशासन के रास्ते पर आगे बढ़ रही है।

1 फरवरी को बजट भाषण में उन्होंने बताया कि 2025-26 में राजकोषीय घाटा 4.4 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है और अब इसे घटाकर 4.3 प्रतिशत तक लाने की योजना है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह रणनीति आर्थिक गति बनाए रखने और सार्वजनिक वित्त को स्थिर रखने के बीच संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाती है। राजकोषीय घाटा सरकार के कुल खर्च और कुल आय के बीच का अंतर होता है।

वित्त मंत्री के अनुसार, सरकार वित्त वर्ष 2026-27 में राजकोषीय जरूरतों को पूरा करने के लिए 11.7 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध उधार लेगी, जबकि कुल बाजार उधारी का अनुमान 17.2 लाख करोड़ रुपये रखा गया है।

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