Last Updated: September 21, 2026

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लॉन्ग टर्म में भारतीय इक्विटी बाजार मजबूत, वैश्विक संकटों का सीमित असर

March 2, 2026

लॉन्ग टर्म में भारतीय इक्विटी बाजार मजबूत, वैश्विक संकटों का सीमित असर

वैश्विक स्तर पर बड़े संघर्षों के बावजूद पिछले 15 वर्षों में भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती दिखाई है। सोमवार को एक रिपोर्ट में यह बात कही गई।

एक्सिस एसेट मैनेजमेंट की रिपोर्ट के अनुसार, जब भी भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा है, तब घरेलू शेयर बाजार सूचकांकों में तेज गिरावट देखी गई है – चाहे वह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हो या वर्ष 2011 में मध्य पूर्व में अशांति के समय।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे घटनाक्रमों के दौरान भले ही भारतीय शेयर बाजार में उल्लेखनीय गिरावट आई हो, लेकिन हर बड़े वैश्विक संघर्ष या युद्ध के बाद बाजार ने वापसी की है और अपनी मजबूती साबित की है।

रिपोर्ट के अनुसार, जो निवेशक अमेरिका-इजरायल-ईरान तनाव जैसे संघर्षों के दौरान घबराकर अपने शेयर बेच देते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि बड़े भू-राजनीतिक संकटों के समय भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन ऐतिहासिक रूप से कैसा रहा है।

अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के बीच मिसाइल हमलों के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में नकारात्मक रुझान देखा गया है।

पिछले 15 वर्षों में यह रुझान कई बार दोहराया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध और भू-राजनीतिक संघर्ष आमतौर पर अल्पकालिक उतार-चढ़ाव लाते हैं, लेकिन यदि संघर्ष क्षेत्रीय स्तर तक सीमित रहें तो लंबे समय तक बाजार में कमजोरी नहीं रहती।

रिपोर्ट में कहा गया कि आम तौर पर देखा गया है कि संघर्ष के कारण बाजार में गिरावट सीमित और अस्थायी होती है, जबकि लंबी अवधि में बाजार की दिशा कंपनियों की आय वृद्धि, तरलता और घरेलू मांग से तय होती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष गंभीर भू-राजनीतिक घटना है, लेकिन भारतीय निवेशकों के लिए यह कोई नई या अभूतपूर्व स्थिति नहीं है।

एक्सिस म्यूचुअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी आशीष गुप्ता ने कहा, “पिछले 15 वर्षों में हर बड़े संघर्ष ने निवेशकों की भावनाओं की परीक्षा ली है और लगभग हर बार भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती दिखाई है। बाजार गिर सकते हैं, मुद्रा कमजोर हो सकती है और तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, लेकिन समय के साथ आर्थिक आधार फिर मजबूत हो जाते हैं। लंबे समय के निवेशकों के लिए सबसे भरोसेमंद रणनीति वही है – निवेश बनाए रखें, समझदारी से विविधीकरण करें और गिरावट के समय अपने निवेश को बढ़ाने का अवसर समझें।”

उन्होंने यह भी कहा कि पहले के संघर्षों के दौरान जो निवेशक घबराकर बाजार से बाहर निकल गए थे, वे अक्सर बाद में आई तेजी से चूक गए, जो कई बार कम समय में ही देखने को मिली।

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