Last Updated: October 7, 2026

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पीएम मोदी बोले, स्वच्छ ऊर्जा में निवेश से खुलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रास्ता

March 3, 2026

पीएम मोदी बोले, स्वच्छ ऊर्जा में निवेश से खुलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रास्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि जब वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में बदलाव हो रहा है, ऐसे समय में जो भारतीय कंपनियां स्वच्छ और हरित ऊर्जा में निवेश कर रही हैं, वे दुनिया के बेहतर बाजारों तक पहुंच बनाने में सफल होंगी।

बजट के बाद आयोजित एक वेबिनार को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष का केंद्रीय बजट आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने और उसे और मजबूत करने की हमारी प्रतिबद्धता को दोहराता है।

उन्होंने कहा, “सतत विकास, कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण मिशन महत्वपूर्ण कदम हैं। अब सतत विकास को व्यापार की मूल रणनीति बनाना होगा और इस वर्ष के बजट ने इसके लिए मजबूत ढांचा तैयार किया है।”

इस ढांचे को सफल बनाने के लिए उद्योग, निवेशकों और अन्य हितधारकों को मिलकर काम करना होगा। जमीनी स्तर पर सामूहिक जिम्मेदारी दिखनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने नीति निर्माताओं और उद्योग जगत से कहा कि वे सरकार के प्रयासों से जुड़ें और लगातार सुझाव देते रहें।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं बदल रही हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ रही है। हमारा संकल्प स्पष्ट है – ज्यादा निर्माण करें, ज्यादा उत्पादन करें, ज्यादा संपर्क बढ़ाएं और ज्यादा निर्यात करें।”

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के लिए बजटीय आवंटन बढ़ाकर रिकॉर्ड 32,914 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इसमें से 22,000 करोड़ रुपए सौर रूफटॉप योजना ‘पीएम सूर्य घर योजना’ के लिए निर्धारित किए गए हैं।

वहीं, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर परियोजना के लिए 600 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, ताकि बुनियादी ढांचे को मजबूत कर नवीकरणीय ऊर्जा को बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके।

इसके साथ ही राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में 600 करोड़ रुपए का आवंटन रखा गया है, जो पिछले वर्ष के अनुमान के बराबर है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और छोटे शहर भारत की विकास यात्रा के प्रमुख स्तंभ हैं।

आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने और मजबूत करने के व्यापक विषय के तहत बजट के बाद चार अलग-अलग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

इन सत्रों में विनिर्माण, औद्योगिक उन्नयन और रणनीतिक क्षेत्र; एमएसएमई, वित्त और बाजार तक पहुंच; शहरों के आर्थिक क्षेत्र; तथा बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन जैसे विषय शामिल हैं।

इन चर्चाओं में यह समझने की कोशिश की जाएगी कि बजट में घोषित सुधार औद्योगिक क्षमता बढ़ाने, प्रतिस्पर्धा सुधारने और रोजगार सृजन को कैसे बढ़ावा दे सकते हैं।

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