Health Department Advisory: रंगों के पर्व होली को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने लोगों से अपील की है कि उत्सव के दौरान अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखें और सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाएं।
जारी परामर्श में कहा गया है कि होली खेलते समय केमिकल युक्त रंगों के बजाय प्राकृतिक, हर्बल या फूलों से बने रंगों का इस्तेमाल करना बेहतर है। रासायनिक रंग त्वचा, आंखों और श्वसन तंत्र पर बुरा असर डाल सकते हैं। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को ऐसे रंगों से दूर रखना चाहिए।
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स्वास्थ्य विभाग ने सलाह दी है कि घर से बाहर निकलने से पहले त्वचा पर नारियल या जैतून का तेल लगा लें, ताकि रंग त्वचा में गहराई तक न समाए और बाद में आसानी से साफ हो सके। आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा पहनने, धूप में निकलते समय सनस्क्रीन लगाने और जरूरत पड़ने पर मास्क का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है, जिससे रंग का पाउडर सांस के जरिए शरीर में न पहुंचे।
विभाग ने यह भी कहा है कि अस्थमा, एलर्जी या अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों से ग्रस्त लोग और बुजुर्ग सूखे रंगों के सीधे संपर्क से बचें। होली के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और खुले या अस्वच्छ स्थानों पर मिलने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करें, क्योंकि इस समय फूड पॉइजनिंग और डिहाइड्रेशन के मामले बढ़ सकते हैं।
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इसके अलावा, पालतू और आवारा जानवरों पर रासायनिक रंगों का इस्तेमाल न करने की अपील की गई है, क्योंकि ये उनके लिए भी हानिकारक हो सकते हैं। यदि किसी को एलर्जी, सांस लेने में तकलीफ, आंख में चोट या किसी प्रकार की गंभीर प्रतिक्रिया हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने की सलाह दी गई है। आपात स्थिति में 112 पर कॉल कर एंबुलेंस सेवा प्राप्त की जा सकती है। संबंधित अस्पतालों के हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं, जिन पर जरूरत पड़ने पर संपर्क किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि थोड़ी सी सतर्कता और सावधानी बरतकर होली का त्योहार सुरक्षित और स्वस्थ तरीके से मनाया जा सकता है।
मेष: दिन शुभ रहेगा...