इंटरनेशनल डेस्क: कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney ने गुरुवार को कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष को देखते हुए कनाडा सैन्य भागीदारी की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं कर सकता। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई में कनाडा की भूमिका को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। हालांकि, इससे पहले उन्होंने यह भी कहा था कि इस संघर्ष की शुरुआत जिन हमलों से हुई। वे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ प्रतीत होते हैं।
ईरान पर कनाडा का रुख
ओटावा में अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कार्नी ने कहा कि कनाडा की नीति साफ है। ईरान लंबे समय से क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने और हिंसा को बढ़ावा देने वाला प्रमुख देश रहा है। ईरान को किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल करने या विकसित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
परमाणु कार्यक्रम पर सख्त संदेश
प्रधानमंत्री ने कहा कि कनाडा और उसके अंतरराष्ट्रीय सहयोगी लगातार ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने की मांग करते रहे हैं। उन्होंने हाल ही में इटली में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में हुई चर्चाओं का जिक्र किया। साथ ही उन्होंने बताया कि पिछले सितंबर में संयुक्त राष्ट्र के तहत ईरान पर प्रतिबंध दोबारा लागू किए गए थे, जिनका उद्देश्य तेहरान पर दबाव बढ़ाना है।
ऑस्ट्रेलिया के साथ साझा बयान
ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कार्नी ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री Anthony Albanese के साथ साझा मंच पर बयान दिया। दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व में बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई और सभी पक्षों से तनाव कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में व्यापक संघर्ष को रोकना बेहद जरूरी है और साथ ही ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर रोक लगाना भी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
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