Last Updated: September 24, 2026

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गुजरात में बनेगी पहली हाई-टेक नर्सरी, खर्च होंगे 3.5 करोड़ रुपए

March 6, 2026

गुजरात में बनेगी पहली हाई-टेक नर्सरी, खर्च होंगे 3.5 करोड़ रुपए

नेशनल डेस्क: गुजरात सरकार बनासकांठा जिले के डीसा तालुका के दावास गांव में पहली हाई-टेक नर्सरी बनाने जा रही है, जो लगभग 13 एकड़ क्षेत्र में फैली होगी। इस नर्सरी की अनुमानित लागत 3.5 करोड़ रुपए है।

राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रवीण माली के मार्गदर्शन में गुजरात वन विभाग और सामाजिक वानिकी विभाग की ओर से पर्यवेक्षित इस परियोजना का उद्देश्य राज्य भर में वृक्षारोपण प्रयासों को मजबूत करना और दुर्लभ पौधों की प्रजातियों का संरक्षण करना है।

अधिकारियों ने कहा कि यह नर्सरी गुजरात में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में काम करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य उन्नत प्रौद्योगिकी, नियंत्रित वातावरण और वैज्ञानिक विधियों का उपयोग करके उच्च गुणवत्ता वाले, रोगमुक्त और मजबूत पौधे उगाना है। यह पहल बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण को बढ़ावा देगी और राज्य के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों को मजबूत करेगी।

यह अत्याधुनिक नर्सरी प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक पौधे तैयार करेगी। धुंध कक्ष, अंकुरण कक्ष, पॉलीहाउस और नेट हाउस सहित उन्नत सुविधाएं प्रतिकूल मौसम की स्थिति में भी शानदार विकास सुनिश्चित करेंगी।

विलुप्त होने की कगार पर खड़ी पौधों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए, पौधों को बिना मिट्टी के उगाना जैसी विशेष तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे पौधों की तीव्र और स्वस्थ वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। इस सुविधा केंद्र में एक बीज बैंक और बीज प्रसंस्करण इकाई भी होगी, जिससे दुर्लभ और मूल्यवान बीजों को वैज्ञानिक तरीके से दीर्घकालिक संरक्षण के लिए संग्रहित किया जा सकेगा।

इसके अतिरिक्त एक ‘नर्सरी सूचना केंद्र’ छात्रों, किसानों और पर्यावरण प्रेमियों को पौध की खेती, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संरक्षण पर मार्गदर्शन प्रदान करेगा। इस परियोजना में स्वस्थ पौधों की वृद्धि के लिए जैविक खाद उत्पादन हेतु एक वर्मीकम्पोस्टिंग इकाई भी शामिल होगी। राज्य भर में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कार्यक्रमों का समर्थन करने के लिए, लंबे और मजबूत पौधों को विकसित करने के तरीके लागू किए जाएंगे।

अधिकारियों ने बताया कि यह नर्सरी न केवल गुजरात के हरित आवरण को बढ़ाएगी बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी मदद करेगी और लुप्तप्राय पौधों की प्रजातियों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देगी। यह नर्सरी आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण में एक मानदंड के रूप में कार्य करेगी, जो राज्य के अन्य जिलों को मार्गदर्शन प्रदान करेगी।

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