इंटरनेशनल डेस्क : हर साल मार्च आते ही चीन की राजधानी बीजिंग में महत्वपूर्ण पॉलिटीकल सीज़न शुरू हो जाता है, जहां देश की संसद और उसके सबसे बड़े सलाहकार मंच की वार्षिक बैठकें होती हैं। यह वह समय होता है जब चीन अपने आने वाले सालों की दिशा तय करता है। इसे कहा जाता है ‘दो सत्र’ या ‘लियांगहुई’। नाम भले सरल हो, लेकिन इसके मायने बहुत गहरे हैं। ‘दो सत्र’ सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं हैं। यह चीन के आने वाले वर्षों का खाका हैं। यहां देश की आर्थिक रफ्तार, तकनीकी दिशा और वैश्विक भूमिका तय होती है।
चीन का ‘दो सत्र’
पहली बैठक होती है राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा यानी एनपीसी। यह चीन की सबसे बड़ी विधायी संस्था है। कानून यहीं बनते और मंजूर होते हैं। दूसरी बैठक है चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन यानी सीपीपीसीसी। यह सलाह देने वाला मंच है, जहां अलग-अलग क्षेत्रों के लोग सरकार को सुझाव देते हैं। दोनों बैठकें आमतौर पर मार्च की शुरुआत में बीजिंग में होती हैं और करीब एक हफ्ते तक चलती हैं। इस साल सीपीपीसीसी की शुरुआत 4 मार्च से हुई और एनपीसी 5 मार्च से शुरू हुई। लगभग पांच हजार प्रतिनिधि इसमें शामिल होते हैं। इनमें राजनीतिक नेता, वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री, उद्योगपति और समाज के अलग-अलग वर्गों के प्रतिनिधि होते हैं। राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री ली छ्यांग भी इन बैठकों में मौजूद रहते हैं।
अब सवाल उठता है, दुनिया इतनी दिलचस्पी क्यों लेती है? वजह साफ है। चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। यहां लिए गए फैसले सिर्फ चीन तक सीमित नहीं रहते। उनका असर एशिया, यूरोप, अमेरिका, हर जगह महसूस होता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय मीडिया से लेकर निवेशक तक, सबकी नजर इन सत्रों पर टिकी रहती है।
सरकार की रिपोर्ट और भविष्य की दिशा
इन सत्रों का सबसे अहम हिस्सा होता है सरकारी कामकाज की रिपोर्ट। इसमें बीते साल का लेखा-जोखा दिया जाता है और आने वाले साल के लक्ष्य घोषित किए जाते हैं। प्रधानमंत्री ली छ्यांग इस रिपोर्ट को पढ़ते हैं। यह सिर्फ भाषण नहीं होता, बल्कि आने वाले समय का खाका होता है। इसमें बताया जाता है कि सरकार किन क्षेत्रों पर ज्यादा जोर देगी। 2026 के लिए जीडीपी वृद्धि का लक्ष्य लगभग 4.5 से 5 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही 2026 से 2030 तक चलने वाली 15वीं पंचवर्षीय योजना पर खास ध्यान है।
चीन में पंचवर्षीय योजनाओं का इतिहास लंबा है। दशकों से यही विकास का आधार रही हैं। कुछ लोग कह सकते हैं कि यह पुराना मॉडल है, लेकिन चीन ने इसी ढांचे के सहारे करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला, बड़े उद्योग खड़े किए और तकनीकी ताकत बढ़ाई। यहां योजना बनती है तो उसे लागू भी किया जाता है। कागज पर लिखकर भूल जाने वाली बात नहीं होती।
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15वीं पंचवर्षीय योजना: स्पीड नहीं, क्वालिटी
15वीं पंचवर्षीय योजना का जोर सिर्फ तेज विकास पर नहीं, बल्कि बेहतर और टिकाऊ विकास पर है। इसे गुणवत्ता आधारित विकास कहा जा रहा है। मतलब साफ है। सिर्फ आंकड़े बड़े दिखाना मकसद नहीं है, बल्कि ऐसा विकास करना है जो लंबे समय तक टिके। नजर सिर्फ 2030 पर नहीं, बल्कि 2035 तक समाजवादी आधुनिकीकरण को मजबूत आधार देने पर है। पिछले कुछ साल आसान नहीं रहे। महामारी का असर, वैश्विक आर्थिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय तनाव। इसके बावजूद चीन ने बुनियादी ढांचे, निर्यात और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में प्रगति जारी रखी। यही अनुभव अब आगे की नीति में काम आएगा।
घरेलू मांग: विकास की असली चाबी
इस बार खास जोर घरेलू मांग बढ़ाने पर है। सरकार समझ रही है कि सिर्फ निर्यात पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है। अगर देश के लोग ज्यादा खर्च करेंगे तो अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार मिलेगा। 2025 में अंतिम उपभोग खर्च ने आर्थिक वृद्धि में 52 प्रतिशत योगदान दिया। यह दिखाता है कि चीन धीरे-धीरे खपत आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। सरकार शहरी और ग्रामीण आय बढ़ाने, सर्विस सेक्टर को मजबूत करने और लोगों की खरीद क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है। वैश्विक स्तर पर ट्रेड वॉर, सप्लाई चेन की समस्या और राजनीतिक तनाव जैसी चुनौतियों के बीच मजबूत घरेलू बाजार एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकता है।
टेक्नोलॉजी: भविष्य की असली लड़ाई
टेक्नोलॉजी भी इस साल की बड़ी प्राथमिकता है। हाल के स्प्रिंग फेस्टिवल गाला में यूनिट्री के ह्यूमनॉइड रोबोट्स का प्रदर्शन सिर्फ मनोरंजन नहीं था, बल्कि एक संकेत था। चीन टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ने की तैयारी कर चुका है। सरकार बेसिक रिसर्च, चिप निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही है। मकसद साफ है। नई उत्पादन क्षमता विकसित करना और नए विकास स्रोत तैयार करना। आज की दुनिया में तकनीक ही असली ताकत है। जो देश तकनीक में पीछे रह गया, वह बाकी क्षेत्रों में भी पिछड़ सकता है। चीन यह जोखिम नहीं लेना चाहता।
सुधार और खुलापन
सुधार और खुलेपन की प्रक्रिया भी जारी रहेगी। एक यूनिफाइड नेशनल मार्केट बनाने, कैपिटल मार्केट में सुधार, और वित्तीय ढांचे को मजबूत करने की दिशा में काम होगा। साल 2029 तक 300 से अधिक महत्वपूर्ण सुधार पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही सर्विस सेक्टर में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और बेल्ट एंड रोड परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर भी ध्यान रहेगा। चीन का संदेश है कि वह दुनिया से कटकर नहीं, बल्कि जुड़कर आगे बढ़ना चाहता है।
स्थिरता का संदेश
आज दुनिया अस्थिर दौर से गुजर रही है। युद्ध, आर्थिक दबाव और राजनीतिक अस्थिरता हर जगह है। ऐसे समय में चीन स्थिरता के साथ आगे बढ़ने की बात कर रहा है। यह कहना आसान है, लेकिन इसे निभाना चुनौतीपूर्ण है। फिर भी चीन की नीति यही है कि स्पष्ट दिशा और लगातार नीति से ही भरोसा बनता है। नई पंचवर्षीय योजना से यह साफ होगा कि आने वाले सालों में चीन किस रास्ते पर चलेगा और किस तरह अपनी गति और संतुलन बनाए रखेगा।
(अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप, बीजिंग)
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