देहरादून (उत्तराखंड): उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर पुलिस ने नकली शैक्षणिक सामग्री पर राज्यव्यापी कार्रवाई के तहत, लगभग ₹10 करोड़ मूल्य की नकली NCERT किताबों की एक बड़ी खेप पकड़ी है। उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय ने ANI को यह जानकारी दी।
मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कार्रवाई उत्तराखंड पुलिस द्वारा नकली सामग्री के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। ऊधम सिंह नगर जिले में इस अभियान को एक बड़ी सफलता मिली, जहाँ बड़ी मात्रा में नकली NCERT किताबें बरामद की गईं।
पुलिस महानिदेशक, दीपम सेठ ने इस ऑपरेशन में शामिल पुलिस टीम के लिए ₹20,000 के इनाम की घोषणा की है। यह घोषणा उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय की ओर से की गई है।
इस बीच, भारत की न्यायिक और कानून-प्रवर्तन प्रणाली के आधुनिकीकरण में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होते हुए, उत्तराखंड ने इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) 2.0 के राष्ट्रीय कार्यान्वयन में पहला स्थान हासिल किया है। यह जानकारी जनवरी 2026 तक के आंकड़ों पर आधारित है।
यह उपलब्धि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दूरदर्शी मार्गदर्शन और प्रौद्योगिकी-संचालित न्याय प्रणाली के निर्माण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के नवीनतम CCTNS/ICJS प्रगति डैशबोर्ड के अनुसार, उत्तराखंड ने 93.46 के शानदार स्कोर के साथ राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त किया है। राष्ट्रीय रैंकिंग में शीर्ष पांच राज्यों का प्रदर्शन अत्यंत सराहनीय रहा है: उत्तराखंड 93.46 अंकों के साथ सबसे आगे है, जिसके बाद हरियाणा (93.41), असम (93.16), सिक्किम (91.82) और मध्य प्रदेश (90.55) का स्थान आता है।
उत्तराखंड की यह सफलता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रभावी नेतृत्व और निरंतर निगरानी का परिणाम है। नए कानूनों—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)—को ज़मीनी स्तर पर लागू करने के लिए, मुख्यमंत्री ने स्वयं कमान संभाली। मुख्यमंत्री धामी ने वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ जिला स्तर के फील्ड अधिकारियों के साथ भी लगातार समीक्षा बैठकें कीं। इस पूरी प्रक्रिया की ऊपर से नीचे तक की निगरानी ने तकनीकी चुनौतियों को समय पर सुलझाने में मदद की और पुलिस विभाग को नए कानूनी ढांचे के अनुसार सफलतापूर्वक ढलने में सक्षम बनाया।
इस उपलब्धि की नींव ICJS 2.0 के तहत “वन डेटा, वन एंट्री” (One Data, One Entry) व्यवस्था में निहित है। इस प्रणाली के माध्यम से, पुलिस (CCTNS), ई-कोर्ट, ई-जेल, ई-अभियोजन और ई-फोरेंसिक के बीच डेटा का निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित किया गया है। एक बार डेटा दर्ज हो जाने के बाद, यह तत्काल सभी संबंधित विभागों के लिए उपलब्ध हो जाता है, जिससे कागजी कार्रवाई कम होती है और मामलों के निपटारे में तेजी आती है।
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