Last Updated: October 10, 2026

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‘ED की छापेमारी में मुख्यमंत्री का दखल देना सही नहीं’, सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी से जताई नाराजगी

March 18, 2026

‘ED की छापेमारी में मुख्यमंत्री का दखल देना सही नहीं’, सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी से जताई नाराजगी

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक कदम पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) छापेमारी कर रही हो, उस समय मुख्यमंत्री का वहां जाकर दखल देना सही नहीं है। यह मामला उस छापेमारी से जुड़ा है, जो ED ने एक राजनीतिक सलाहकार कंपनी I-PAC के दफ्तर में की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस पंकज मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि अगर किसी केंद्रीय एजेंसी के काम में बाधा आती है, तो उसे बिना किसी मदद के नहीं छोड़ा जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह की स्थिति “अच्छी नहीं” है, खासकर जब जांच चल रही हो।

पश्चिम बंगाल सरकार की दलील क्या थी?

राज्य सरकार की ओर से वकील श्याम दीवान ने कहा कि ED कोई अलग कानूनी संस्था नहीं है, बल्कि सरकार का एक विभाग है। इसलिए वह सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट नहीं जा सकती। अगर एजेंसियों को यह अधिकार मिल गया, तो यह देश के संघीय ढांचे (केंद्र-राज्य संतुलन) के लिए खतरनाक हो सकता है।

कपिल सिब्बल ने क्या तर्क दिए?

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा ED, सीबीआई को सीधे FIR दर्ज करने के लिए नहीं कह सकती। जब तक कोई मूल अपराध (predicate offence) दर्ज नहीं होता, ED जांच शुरू नहीं कर सकती। ED मौलिक अधिकार के नाम पर सुप्रीम कोर्ट जाकर CBI से केस दर्ज कराने की मांग नहीं कर सकती।

पूरा मामला क्या है?

जनवरी में, जब ED I-PAC से जुड़े एक अधिकारी के घर और दफ्तर पर छापा मार रही थी, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वहां पहुंच गई थीं। ED का आरोप है कि उन्होंने छापेमारी के दौरान हस्तक्षेप किया। कुछ अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सामान अपने साथ ले गईं इससे जांच में बाधा आई। हालांकि, ममता बनर्जी ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि ED राजनीतिक दबाव में काम कर रही है और यह कार्रवाई बदले की भावना से की गई है।

यह मामला अब केंद्र और राज्य के अधिकारों, जांच एजेंसियों की सीमा और संविधान के इस्तेमाल जैसे बड़े मुद्दों से जुड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई में यह साफ हो सकता है कि ऐसे मामलों में एजेंसियों और राज्यों की भूमिका क्या होगी।

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