हिमाचल डेस्कः प्रदेश के आर्थिक इतिहास में आज का दिन एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बन गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने कार्यकाल का चौथा बजट पेश करते हुए राज्य के भविष्य की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत की। यह बजट केवल वित्तीय आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि वर्ष 2032 तक हिमाचल को देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने की दिशा में एक रणनीतिक विजन भी दर्शाता है।
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आर्थिक चुनौतियाँ और ‘मिशन 2032’
यह बजट ऐसे समय में आया है जब राज्य गंभीर वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। 1 अप्रैल से केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली राजस्व घाटा अनुदान (RDG) समाप्त होने जा रही है, जिससे राज्य की वित्तीय आत्मनिर्भरता की असली परीक्षा शुरू होगी।
हमारी सरकार ने पिछले वर्ष हिमाचल प्रदेश की पंजीकृत सहकारी संस्थाओं के लिए दूध क्रय से जुड़ी एक दूध प्रोत्साहन योजना प्रारंभ की है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को DBT के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में 3 रुपए प्रति लीटर की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
हमारा उद्देश्य इन… pic.twitter.com/DD9NWxV2wf
— Sukhvinder Singh Sukhu (@SukhuSukhvinder) March 21, 2026
किसानों और पशुपालकों के लिए बड़ी राहत
इस बजट का मुख्य फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालन को मजबूत करना रहा। सरकार ने किसानों और पशुपालकों को राहत देते हुए दूध के समर्थन मूल्य में 10 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है:
गाय का दूध: 51 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर
भैंस का दूध: 61 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर
इसके अलावा, भेड़पालन व्यवसाय को पुनर्जीवित करने के लिए 300 करोड़ रुपये की एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की गई है। चरवाहों के लिए ‘डिजिटल कार्ड’ जारी किए जाएंगे और उन्हें जीवन बीमा की सुविधा भी दी जाएगी, जिससे उनकी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री सुक्खू का यह बजट “आत्मनिर्भर हिमाचल” के विजन को साकार करने की दिशा में एक ठोस और दूरदर्शी कदम है।
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