Last Updated: September 28, 2026

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राजनीतिज्ञों ने अपने नेताओं के नाम पर शानदार स्मारक बनाए, लेकिन शहीद-ए-आज़म भगत सिंह को नजरअंदाज किया:CM MANN

March 26, 2026

राजनीतिज्ञों ने अपने नेताओं के नाम पर शानदार स्मारक बनाए, लेकिन शहीद-ए-आज़म भगत सिंह को नजरअंदाज किया:CM MANN

कहा- अगर शहीद-ए-आज़म भगत सिंह भारत के पहले प्रधानमंत्री होते तो देश की तस्वीर कुछ और होती 

खटकड़ कलां: शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के उनके शहीदी दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह दिन देश को शहीदों द्वारा दी गई महान कुर्बानी की याद दिलाता है। उन्होंने लोगों से मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले महान क्रांतिकारी की सोच को अपनाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने शहीदों का सम्मान करने और उनके सपनों का रंगला पंजाब बनाने के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

देश के महान क्रांतिकारियों की गौरवशाली विरासत को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह अवसर केवल उनकी कुर्बानी को याद करने का ही नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और अन्याय के खिलाफ लड़ने के संकल्प को आगे बढ़ाने का भी है। उन्होंने उनके सपनों के पंजाब और देश की सेवा करने के अपने संकल्प को दोहराया, साथ ही इन स्वतंत्रता सेनानियों को भारत रत्न (सबसे बड़ा सम्मान) न दिए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि शुरुआती वर्षों में देश की बागडोर ऐसे साहसी और प्रगतिशील युवाओं के हाथों में होती तो देश की स्थिति अलग होती।

जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “यह दिन हमें शहीद भगत सिंह द्वारा मातृभूमि के लिए दी गई अद्वितीय कुर्बानी की याद दिलाता है। शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव की शहादत हमें हमेशा अन्याय और अत्याचार के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देती रहेगी। समाज में मौजूद हर प्रकार की बुराइयों के खिलाफ लड़ना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है।”

शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा ही गरीबी और सामाजिक बुराइयों को जड़ से खत्म करने का एकमात्र स्थायी समाधान है। उन्होंने कहा, “शिक्षा समाज की सभी समस्याओं का इलाज है, इसलिए पंजाब सरकार ने इस क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। कोई भी मुफ्त सुविधा या रियायत गरीबी या सामाजिक बुराइयों को खत्म नहीं कर सकती, लेकिन शिक्षा लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाकर उन्हें मजबूरी और बेबसी के इस चक्र से बाहर निकाल सकती है। इसीलिए हमारी सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और आम आदमी को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।”

सामाजिक परिवर्तन में ज्ञान की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, “शिक्षा वह प्रकाश है जो अज्ञानता के अंधकार को दूर करता है। यदि हम वास्तविक बदलाव चाहते हैं, तो हमें अपने बच्चों को शिक्षित करना होगा, उन्हें सशक्त बनाना होगा और समाज को ऊपर उठाकर गरीबी को खत्म करना होगा। असली बदलाव अस्थायी लाभों से नहीं, बल्कि सच्चे ज्ञान और जागरूकता से आएगा।”

शहीदों के सपनों को साकार करने के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार हमारे महान शहीदों के संकल्पों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। उन्होंने आगे कहा कि हम पंजाब की तरक्की और इसके लोगों की खुशहाली सुनिश्चित करने के लिए वचनबद्ध हैं। वह दिन दूर नहीं जब हमारे सामूहिक प्रयासों से पंजाब देश में एक अग्रणी राज्य के रूप में उभरेगा।

23 मार्च के महत्व के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि केवल 23 मार्च होने के कारण यह दिन खास नहीं है, बल्कि यह एक साधारण दिन असाधारण बन जाता है क्योंकि इसी विशेष दिन देश के तीन वीर सपूतों ने देश के लिए अपनी जवानी और जान कुर्बान की थी। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उनकी शहादत ने आजादी के संग्राम में नया जोश भर दिया और उनके अथाह योगदान के कारण 15-16 वर्षों के भीतर लाल किले पर भारतीय तिरंगा फहराया जा सका।

मुख्यमंत्री ने शहीदों की कुर्बानी के निस्वार्थ स्वरूप और लोकतांत्रिक अधिकारों की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शहीद-ए-आज़म भगत सिंह और उनके साथियों ने सत्ता या राजनीतिक लाभ के लिए अपनी जान नहीं दी थी। उनकी कुर्बानी निस्वार्थ थी। उन्हीं की बदौलत आज हमें वोट डालने का अधिकार मिला है। जब हम अपने वोटर आईडी कार्ड को देखते हैं तो हमें अपनी तस्वीर दिखाई देती है, लेकिन यदि हम ध्यान से देखें तो हमें इन शहीदों की महक महसूस होगी। इसलिए हमें अपने वोट का उपयोग समझदारी से करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आज़ादी से पहले लोग त्योहार तो मनाते थे, लेकिन अंग्रेजों के शासन के कारण हमें वोट डालने का कोई अधिकार नहीं था। इन शहीदों ने इस अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी ताकि हम लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से अपना नेता चुन सकें। उन्होंने कहा कि यह अधिकार बहुत महत्वपूर्ण है और लोगों को पैसे, प्रभाव या लालच में आकर कभी भी अपना वोट नहीं बेचना चाहिए।

पंजाब के योगदान को उजागर करते हुए उन्होंने कहा कि देश की आबादी का केवल दो प्रतिशत होने के बावजूद, आजादी के संग्राम के दौरान फांसी दिए गए या निर्वासित किए गए 80 प्रतिशत शहीद पंजाब से थे। उन्होंने कहा कि आजादी के समय जब देश जश्न मना रहा था, पंजाब ने विभाजन की भयावहता का सामना किया, जहां लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई, बेघर हुए और अपनी संपत्ति हमेशा के लिए खो दी।

अपनी सरकार के दृष्टिकोण की पुष्टि करते हुए मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि आप सरकार शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के सपनों को साकार करने और एक सौहार्दपूर्ण तथा समानतावादी समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। इस युवा नायक ने देश को विदेशी शासन से मुक्त कराने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम उनके दृष्टिकोण को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे उन्होंने आगे कहा कि हम अपने शहीदों के राह पर चलते हुए पहले ही कई जन-हितैषी और विकासोन्मुखी योजनाएँ शुरू की हुई हैं।

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