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हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 28 मार्च 2026

March 28, 2026

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 28 मार्च 2026

Daily Hukamnama 28 March 2026: रागु सूही महला ५ घरु ५ पड़ताल ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ प्रीति प्रीति गुरीआ मोहन लालना ॥ जपि मन गोबिंद एकै अवरु नही को लेखै संत लागु मनहि छाडु दुबिधा की कुरीआ ॥१॥ रहाउ ॥ निरगुन हरीआ सरगुन धरीआ अनिक कोठरीआ भिंन भिंन भिंन भिन करीआ ॥ विचि मन कोटवरीआ ॥ निज मंदरि पिरीआ ॥ तहा आनद करीआ ॥ नह मरीआ नह जरीआ ॥१॥ किरतनि जुरीआ बहु बिधि फिरीआ पर कउ हिरीआ ॥ बिखना घिरीआ ॥ अब साधू संगि परीआ ॥ हरि दुआरै खरीआ ॥ दरसनु करीआ ॥ नानक गुर मिरीआ ॥ बहुरि न फिरीआ ॥२॥१॥४४॥

Daily Hukamnama 28 March 2026 अर्थ :- हे भाई ! (दुनिया की) प्रीत (माया) में से बड़ी प्रीति मन को मोहने वाले लाल-भगवान की है। हे मन ! सिर्फ उस भगवान का नाम जपा कर। ओर कोई प्रयास उस की दरगाह में क़बूल नहीं होता। हे भाई ! संतो की चरणी लगा रह, और अपने मन में से डाँवाँडोल रहने-वाली दशा की पगडंडी दूर कर।1।रहाउ। हे भाई ! निरलेप भगवान ने त्रिगुणी संसार बनाया, इस में यह अनेकों (शरीर-) कोठड़ीयां उस ने अलग अलग (प्रकार की) बना दी । (हरेक शरीर-कोठड़ी) में मन को कोतवाल बना दिया। प्यारा भगवान (हरेक शरीर-कोठड़ी में) अपने मन्दिर में रहता है, और वहाँ आनंद मनाता है। उस भगवान को ना मौत आती है, ना बुढापा उस के करीब आता है।1। हे भाई ! जीव भगवान की रची रचना में ही जुड़ा रहता है, कई तरीको के साथ भटकता घूमता है, पराए (धन को, रूप को) देखता घूमता है, विषय-विकारों में घिरा रहता है। इस मनुष्य के जन्म में जब जीव गुरु की संगत में पहुँचता है, तो भगवान के दर पर आ खड़ा होता है, (भगवान का) दर्शन करता है। हे नानक ! (जो भी मनुख) गुरु को मिलता है, वह फिर जन्म-मरण के गेड़ में नहीं भटकता।2।1।44।

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