Census: देश में आज से बहुप्रतीक्षित जनगणना प्रक्रिया का पहला चरण शुरू हो गया है, जो इस बार कई मायनों में खास है। भारत सरकार द्वारा आयोजित यह जनगणना पहली बार पूरी तरह डिजिटल तरीके से की जा रही है, जिसमें नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प भी दिया गया है।
डिजिटल युग की ओर बड़ा कदम
इस बार की जनगणना में “मकान सूचीकरण और आवास गणना (HLO)” चरण के तहत कुल 33 प्रश्नों के जरिए घर और परिवार से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। यह प्रक्रिया 1 अप्रैल से शुरू होकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कार्यक्रम के अनुसार 30 सितंबर तक चलेगी। कोविड-19 महामारी के कारण 2021 में टली यह जनगणना अब नए स्वरूप में आयोजित की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया लगभग एक वर्ष तक चलेगी और इसके निष्कर्ष भविष्य की नीतियों के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे।
क्या-क्या जानकारी ली जाएगी
जनगणना के पहले चरण में अधिकारियों द्वारा मकान की संरचना, निर्माण सामग्री, उपयोग और स्थिति से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाएगी। इसके साथ ही परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का विवरण, सामाजिक वर्ग, स्वामित्व की स्थिति और घर में उपलब्ध कमरों की संख्या जैसी जानकारी भी एकत्र की जाएगी।
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इसके अलावा, पीने के पानी का स्रोत, शौचालय की सुविधा, बिजली, रसोई ईंधन, इंटरनेट और संचार साधनों सहित जीवन स्तर से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को भी शामिल किया गया है। घरेलू संपत्तियों जैसे टीवी, मोबाइल, वाहन और कंप्यूटर आदि के स्वामित्व का डेटा भी जुटाया जाएगा।
सेल्फ-एन्युमरेशन की सुविधा
इस जनगणना की सबसे बड़ी खासियत सेल्फ-एन्युमरेशन है। नागरिक अब वेब पोर्टल के माध्यम से 16 भाषाओं में खुद अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए परिवार का कोई भी सदस्य मोबाइल नंबर के जरिए पंजीकरण कर सकता है, अपने घर का स्थान मैप पर चिन्हित कर सकता है और सुविधानुसार जानकारी भर सकता है।
जानकारी जमा करने के बाद 16 अंकों की एक यूनिक सेल्फ-एन्युमरेशन आईडी (SE ID) जनरेट होगी, जिसे बाद में सत्यापन के दौरान गणनाकर्मी को दिखाना होगा। यह प्रक्रिया न केवल समय बचाएगी बल्कि डेटा संग्रह को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाएगी।
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गोपनीयता पर विशेष जोर
गृह मंत्रालय के अनुसार, जनगणना में दी गई सभी व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी। इसे न तो किसी सरकारी योजना में सीधे उपयोग किया जाएगा और न ही अदालत में साक्ष्य के रूप में पेश किया जा सकेगा।
ऐतिहासिक महत्व
स्वतंत्रता के बाद यह देश की आठवीं जनगणना है, जबकि पिछली बार यह प्रक्रिया 2011 में संपन्न हुई थी। इस बार डिजिटल तकनीक के समावेश के साथ यह न केवल आंकड़ों के संग्रह का माध्यम बनेगी, बल्कि देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का एक व्यापक डिजिटल दस्तावेज भी तैयार करेगी।