Last Updated: September 21, 2026

Dainik Savera Times Logo

IBC में बदलाव से बढ़ेगी रिकवरी, दिवाला कंपनियों की संपत्तियों से जल्द मिलेगा मूल्य

April 1, 2026

IBC में बदलाव से बढ़ेगी रिकवरी, दिवाला कंपनियों की संपत्तियों से जल्द मिलेगा मूल्य

दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) (संशोधन) विधेयक, 2025, दिवालियापन के लिए तेज और लेनदार-केंद्रित दृष्टिकोण स्थापित करके कंपनियों के साथ-साथ बैंकों को संकटग्रस्त संस्थाओं की संपत्तियों से शीघ्र मूल्य प्राप्त करने में मदद करेगा। यह जानकारी एक्सपर्ट की ओर से बुधवार को दी गई।

दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक पर आज राज्यसभा में चर्चा की गई। इसे कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ​​ने विधेयक पेश किया। इस बिल को लोकसभा से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।

इस विधेयक में कंपनी के डिफॉल्ट साबित हो जाने के बाद दिवालियापन के आवेदनों को स्वीकार करने के लिए 14 दिनों की अनिवार्य समय सीमा निर्धारित की गई है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, इस विधेयक में 12 संशोधन प्रस्तावित किए हैं ताकि समाधान तंत्र को और मजबूत किया जा सके।

फोरसाइट लॉ ऑफिस इंडिया के फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर एडवोकेट वरुण सिंह ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक न्यायालयों को केवल इस आधार पर दिवालियापन प्रक्रिया शुरू करने की क्षमता प्रदान करता है कि डिफॉल्ट हुआ है और इसके लिए बैंक द्वारा रखे गए वित्तीय रिकॉर्ड को साक्ष्य माना जाएगा।

ये भी पढ़ें : https://dainiksaveratimes.com/business/petrol-diesel-lpg-availability-india-assurance/

उन्होंने आगे कहा कि इस प्रावधान का उद्देश्य किसी कंपनी द्वारा दिवालियापन के लिए आवेदन करने से पहले होने वाली देरी या मुकदमेबाजी की संभावना को समाप्त करना है। इसके अतिरिक्त, इससे दिवालियापन प्रक्रिया में अधिक निश्चितता आएगी और प्रक्रियात्मक बाधाएं कम होंगी, जिससे ऋणदाता के ऋण की वसूली समय पर हो सकेगी।

सिंह के मुताबिक, इसमें बैंकिंग क्षेत्र के लेनदारों द्वारा दिवालियापन प्रक्रिया (51 प्रतिशत वित्तीय लेनदारों की स्वीकृति के बाद) शुरू करने का प्रावधान किया गया है। इससे किसी कंपनी की संपत्तियों का मूल्य गिरने से पहले हस्तक्षेप की अनुमति मिलेगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विधेयक की मंजूरी के समय लोकसभा में कहा था कि 2016 में लागू हुई दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति में सुधार का एक प्रमुख कारक रही है। इस ढांचे ने कंपनियों को समय के साथ बेहतर क्रेडिट रेटिंग प्राप्त करने में भी मदद की है।

साथ ही, उन्होंने कहा कि इस कानून का उद्देश्य संकटग्रस्त संपत्तियों का समाधान करना है, न कि केवल बकाया राशि की वसूली करना।

उन्होंने स्पष्ट किया, “आईबीसी व्यवहार्य व्यवसायों को बचाने और उद्यम मूल्य को संरक्षित करते हुए वित्तीय संकट को दूर करने का एक ढांचा है। आईबीसी का उद्देश्य कभी भी ऋण वसूली का साधन बनना नहीं था।”

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें