चंडीगढ़। प्रवर्तन निदेशालय (ED) अदालत ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और मोतीलाल वोहरा को बरी कर दिया। यह जमीन आवंटन का मामला वर्ष 1982 में शुरू हुआ था। यह जमीन अखबार प्रकाशन के उद्देश्य से आवंटित की गई थी।
जमीन आवंटन के समय हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी और भजनलाल मुख्यमंत्री थे। शर्तों के अनुसार निर्धारित समय सीमा में निर्माण कार्य शुरू नहीं होने पर वर्ष 1992 में सरकार ने यह प्लाॅट वापस ले लिया था। इसके बाद एजेएल ने इस निर्णय को चुनौती दी। वर्ष 2005 में जब राज्य में पुनः कांग्रेस सरकार बनी और भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री बने। तब इस प्लाॅट का दोबारा आवंटन एजेएल को कर दिया। इसी पुनः आवंटन को लेकर बाद में विवाद खड़ा हुआ और शिकायतों के आधार पर जांच शुरू हुई।
वर्ष 2016 में हरियाणा विजिलेंस ब्यूरो ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की, जिसमें हुड्डा समेत हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (तत्कालीन हुडा) के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को आरोपी बनाया गया। बाद में यह जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की स्पेशल कोर्ट को सौंप दी गई। ईडी की स्पेशल कोर्ट ने 27 जनवरी 2017 को मामला दर्ज कर पहली दिसंबर 2018 को आरोपपत्र दाखिल किया।
इसके बाद आरोप तय किए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट की ओर से 2021 से 2025 तक मामले की सुनवाई पर रोक लग गई। सुनवाई के बाद अदालत ने पाया कि प्रथम दृष्टया आरोपों को समर्थन देने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं हैं और आरोप तय करने के आदेशों को कैंसल कर दिया।
हाईकोर्ट के निर्णय के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की स्पेशल कोर्ट की विशेष अदालत ने भी उसी आधार पर आगे बढ़ते हुए आरोपियों को राहत दे दी। अदालत ने कहा कि प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आपराधिक मामला चलाना संभव नहीं है। शुक्रवार को नेशनल हेराल्ड मामले में एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) पर अपना फैसला सुनाते हुए, पंचकूला की प्रवर्तन निदेशालय (ED) अदालत ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा और मोतीलाल वोरा को बरी कर दिया।
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