Last Updated: October 10, 2026

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लोगों के लिए वरदान साबित हो रही ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’, 4 महीने की बच्ची को मिला ₹2.77 लाख का इलाज

April 9, 2026

लोगों के लिए वरदान साबित हो रही ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’, 4 महीने की बच्ची को मिला ₹2.77 लाख का इलाज

चंडीगढ़: मुख्यमंत्री सेहत योजना (MMSY) के प्रारंभ के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा था, “इलाज की चिंता करें , बिल की नहीं। सरकार आपकी जेब बनेगी।”अबोहर में रशप्रीत कौर और भारत कुमार के घर जन्मी चार महीने की दिलजोत जैसे परिवारों के लिए ये शब्द बहुत मायने रखते हैं।

दिलजोत को गंभीर संक्रमण और वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (दिल में छेद) की समस्या पाई गई, जो जन्म से पहले विकसित होती है। उसके अभिभावक उसे इलाज के लिए बठिंडा ले गए, उनका एकमात्र उद्देश्य उसे जीवित रखना था। गहन चिकित्सा का खर्च बहुत भारी था, लेकिन मुख्यमंत्री सेहत योजना से मिली मदद के बाद स्थिति संभल गई। दिलजोत को विशेष चिकित्सा देखभाल मिली, जिसमें चौबीस घंटे निगरानी शामिल थी, और उसके परिवार को एक दिन भी पैसों की चिंता नहीं करनी पड़ी। भारत कुमार, जो अबोहर में एक छोटा सैलून चलाते हैं, ने कहा, “डॉक्टरों ने मुझे बताया कि मेरी बेटी के दिल में छेद है। उसका इलाज दो अलग-अलग अस्पतालों में हुआ और सेहत कार्ड के तहत ₹2.77 लाख का पूरा खर्च कवर हो गया।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रही यह योजना सुनिश्चित करती है कि किसी भी परिवार को स्वास्थ्य और आर्थिक बोझ में से किसी एक का चुनाव न करना पड़े।

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत, हर माँ और नवजात को सालाना ₹10 लाख तक का कैशलेस इलाज मिल सकता है, चाहे वह सरकारी अस्पताल हो या सूचीबद्ध निजी अस्पताल, और यह सुविधा बच्चे के जीवन के शुरुआती घंटों से ही उपलब्ध होती है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बलबीर सिंह ने कहा, “हम गाँवों में कार्यक्रम चला रहे हैं ताकि परिवार समय पर जाँच कराएं और इलाज में देरी न करें।” पिछले तीन महीनों में ही 6,000 से अधिक नवजात मामलों का इलाज मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत किया गया है, जो नवजात शिशुओं को समय पर चिकित्सा देखभाल प्रदान करने में योजना की बढ़ती पहुँच को दर्शाता है। यह योजना जन्म के समय कम वजन, समय से पहले जन्म, संक्रमण और अन्य नवजात जटिलताओं के इलाज में मदद करती है ;और मातृ व प्रसवोत्तर सेहत सेवाओं को मजबूत बनाती है।

दिलजोत का मामला अकेला नहीं है। पूरे पंजाब में अब परिवार नवजात शिशुओं को शुरुआती दिनों में ही इलाज के लिए अस्पताल ला रहे हैं, क्योंकि उन्हें भरोसा है कि खर्च उन्हें नहीं उठाना पड़ेगा l

बठिंडा के अग्रवाल अस्पताल में एक नवजात, जिसे गंभीर पीलिया के साथ साँस लेने में दिक्कत थी, का ₹1 लाख खर्च का इलाज पूरी तरह मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत कवर हुआ।

पटियाला के गढ़ाया गाँव के मनकीरत सिंह को जन्म के कुछ दिनों बाद पीलिया और साँस की समस्या के लिए इलाज की जरूरत थी।उनके पिता, बलविंदर सिंह ने कहा, “मेरे बेटे का जन्म 25 मार्च को हुआ था और उसे कुछ स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ थीं। हम उसके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित थे, लेकिन इससे भी ज्यादा चिंता हमें इस बात की थी कि हम इलाज का खर्च कैसे उठाएंगे l मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की योजना का धन्यवाद, कि इलाज का पूरा खर्च कवर हो गया।”

फरीदकोट के कोटकपूरा की बिमला रानी ने हाल ही में एक बच्चे को जन्म दिया, जिसे नवजात देखभाल की जरूरत थी। उनके परिवार के एक सदस्य के मुताबिक उनका अठारह दिन का बच्चा अब सुरक्षित रूप से मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत इलाज पा रहा है।

ये मामले एक बढ़ती हुई प्रवृत्ति को दर्शाते हैं। मुख्यमंत्री सेहत योजना के शुभारंभ के बाद, पूरे पंजाब से अधिकांश परिवार माताओं और नवजात शिशुओं को पहले 72 घंटों के भीतर अस्पताल ला रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य परिणाम बेहतर हो रहे हैं और देरी से बढ़ने वाली जटिलताएँ कम हो रही हैं। पंजाब सरकार, निवासियों को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है कि वे निर्धारित केंद्रों और जमीनी स्तर पर लगाए जा रहे शिविरों के माध्यम से सेहत कार्ड के लिए नामांकन करवाएं , ताकि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत कैशलेस इलाज का लाभ उठा सकें।

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