
खेल डेस्क: IPL 2026 के बीच बुरी खबर सामने आई है। भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे उम्रदराज और सम्मानित चेहरों में शुमार चिंगलपुत दोराइकन्नु गोपीनाथ 96 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोपीनाथ का निधन चेन्नई के अड्यार में अपनी बेटी के घर पर हुआ। साल 2024 में दत्ता गायकवाड़ के निधन के बाद, गोपीनाथ उस भारतीय टीम के आखिरी जीवित सदस्य थे जिसने देश की पहली टेस्ट जीत दर्ज की थी।
तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन ने इस महान खिलाड़ी के निधन पर शोक जताते हुए ‘एक्स’ पर लिखा, “रेस्ट इन पीस, सीडी गोपीनाथ! भारतीय क्रिकेट के सच्चे अग्रदूत और उस ऐतिहासिक टीम के आखिरी जीवित सदस्य, जिसने भारत की पहली टेस्ट जीत की कहानी लिखी थी। आपकी विरासत इस खेल के समृद्ध इतिहास में हमेशा के लिए अमर रहेगी।” 1 मार्च 1930 को चेन्नई (उस समय मद्रास के नाम से जाना जाता था) में जन्मे गोपीनाथ क्रिकेट के एक क्लासिक दौर का प्रतिनिधित्व करते थे। इस दाएं हाथ के बल्लेबाज ने मद्रास के लिए घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन से पहचान बनाई, जिससे आखिरकार राष्ट्रीय टीम में उनके चयन का रास्ता खुला।

सीडी गोपीनाथ ने साल 1951-52 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू करते हुए अपनी छाप छोड़ी थी। अपने पहले ही मैच में गोपीनाथ ने नाबाद अर्धशतक लगाया, जिसके बाद उसी सीरीज में ब्रेबोर्न स्टेडियम में भी शानदार पारी खेली। गोपीनाथ ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच साल 1960 में ईडन गार्डन्स के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला था। गोपीनाथ ने चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ भारत की ऐतिहासिक टेस्ट जीत में भी अहम भूमिका निभाई थी, उन्होंने 35 रनों का अहम योगदान दिया और वीनू मांकड़ की गेंद पर ब्रायन स्टैथम का एक महत्वपूर्ण कैच लपककर उन्हें आउट किया था। वीनू मांकड़ उस मैच के स्टार खिलाड़ी रहे, जिन्होंने पहली पारी में 8 विकेट और दूसरी पारी में 4 विकेट निकाले।
Rest in peace, CD Gopinath! A true pioneer of Indian cricket and the last surviving member of the historic team that scripted India’s first-ever Test victory. Your legacy will forever be etched in the game’s rich history. 🙏#TamilNaduCricket #TNCA #TNCricket pic.twitter.com/DucL15zBOO
— TNCA (@TNCACricket) April 9, 2026
गोपीनाथ ने अपने टेस्ट करियर में 8 मैच खेले, जिसमें 22 की औसत के साथ 242 रन बनाए। इसमें एक अर्धशतकीय पारी भी शामिल रही। इसके अलावा, उन्होंने 1 विकेट भी अपने नाम किया। वहीं, 83 फर्स्ट क्लास मुकाबलों में दाएं हाथ के इस खिलाड़ी ने 9 शतकों के साथ 4,259 रन बनाने के अलावा, 14 विकेट हासिल किए।
गोपीनाथ ने 1950 के दशक के मध्य से लेकर 1960 के दशक की शुरुआत तक कई सीजन में मद्रास की कमान संभाली। साल 1970 के दशक में वह राष्ट्रीय चयनकर्ता बने और फिर चयन समिति के अध्यक्ष भी रहे। 1979 के इंग्लैंड दौरे के दौरान उन्होंने भारतीय टीम के मैनेजर के तौर पर भी काम किया।
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