Last Updated: September 22, 2026

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‘सागरमाला’ से समुद्री विकास को बढ़ावा, 1.57 लाख करोड़ की 315 योजनाएं पूरी

April 11, 2026

‘सागरमाला’ से समुद्री विकास को बढ़ावा, 1.57 लाख करोड़ की 315 योजनाएं पूरी

देश के समुद्री क्षेत्र में पिछले एक दशक में जबरदस्त विस्तार देखने को मिला है, जिसमें क्षमता, कनेक्टिविटी और संचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के प्रमुख प्रोग्राम ‘सागरमाला’ ने बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, तटीय और अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास और कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

सरकार द्वारा शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में ‘सागरमाला’ प्रोग्राम ने ठोस परिणाम दिए हैं। ‘सागरमाला 2.0’ के तहत 85,482 करोड़ रुपए के निवेश से लगभग 3.6 लाख करोड़ रुपए के निवेश को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है।

इस कार्यक्रम के तहत अब तक करीब 845 परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनकी कुल लागत लगभग 6.06 लाख करोड़ रुपए है। 24 मार्च 2026 तक 1.57 लाख करोड़ रुपए की लागत वाली 315 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 210 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं और 320 परियोजनाएं योजना चरण में हैं।

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सरकार के अनुसार, पूरी हो चुकी परियोजनाओं से बंदरगाहों की क्षमता बढ़ी है, जहाजों के टर्नअराउंड टाइम में कमी आई है और पोर्ट-आधारित औद्योगिक विकास के साथ-साथ तटीय क्षेत्रों का भी विकास हुआ है। ये सभी पहल देश के व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को मजबूती देने में मदद कर रही हैं।

भारत के प्रमुख बंदरगाहों ने वित्त वर्ष 2025-26 में 915.17 मिलियन टन कार्गो हैंडल किया, जो तय लक्ष्य 904 मिलियन टन से अधिक है। यह सालाना आधार पर 7.06 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है, जो समुद्री व्यापार में लगातार बढ़ोतरी का संकेत है।

इसके अलावा, जहाजों के औसत टर्नअराउंड समय में भी बड़ा सुधार हुआ है, जो 2014 में 96 घंटे से 2025 में घटकर 49.5 घंटे रह गया है। इससे बंदरगाहों की दक्षता और तेजी से माल ढुलाई की क्षमता में सुधार हुआ है।

वैश्विक स्तर पर भी भारतीय बंदरगाहों की स्थिति मजबूत हुई है। देश के 9 बंदरगाह दुनिया के शीर्ष 100 बंदरगाहों में शामिल हो गए हैं, जिनमें विशाखापत्तनम बंदरगाह कंटेनर ट्रैफिक के मामले में शीर्ष 20 में जगह बना चुका है।

अंतर्देशीय जलमार्गों के जरिए कार्गो परिवहन में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई है। यह 2013-14 में 18.10 मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़कर 2024-25 में 145.50 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गया है, जो करीब 700 प्रतिशत की वृद्धि है। इससे लॉजिस्टिक्स सिस्टम अधिक कुशल और विविधतापूर्ण बना है।

‘सागरमाला’ प्रोग्राम के तहत 1,057 करोड़ रुपए की लागत से 11 फिशिंग हार्बर परियोजनाएं भी पूरी की गई हैं, जिससे 30,000 से अधिक मछुआरों को सीधे लाभ मिला है। इसके अलावा, कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए तटीय क्षेत्रों में लोगों की आजीविका में भी सुधार हुआ है।

इसके अतिरिक्त, ‘सागरमाला’ प्रोग्राम से लगभग 1 करोड़ रोजगार सृजन की संभावना जताई गई है, जिसमें 40 लाख प्रत्यक्ष और 60 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल हैं। यह कार्यक्रम भारत के समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी नई दिशा दे रहा है।

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