Last Updated: October 13, 2026

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Jammu Kashmir: LG मनोज सिन्हा का ऐलान, कहा- नशा तस्करों के पासपोर्ट-आधार होंगे रद्द

April 11, 2026

Jammu Kashmir: LG मनोज सिन्हा का ऐलान, कहा- नशा तस्करों के पासपोर्ट-आधार होंगे रद्द

जम्मू-कश्मीर डेस्क। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को 100 दिन लंबे ‘नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान’ की शुरुआत करते हुए ड्रग तस्करों के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नशा तस्करों के पासपोर्ट, आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे। उनकी चल और अचल संपत्तियां जब्त कर ली जाएंगी, बैंक खाते फ्रीज कर दिए जाएंगे और वित्तीय जांच शुरू की जाएगी।

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एलजी ने मौलाना आजाद स्टेडियम में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ लड़ाई एक सामूहिक जिम्मेदारी है। यह बुराई हर गांव, हर जिले और समाज के हर वर्ग तक फैल चुकी है। उन्‍होंने कहा कि नशा नेटवर्क को आर्थिक और कानूनी रूप से खत्म करने के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की गई है।

मनोज सिन्‍हा ने कहा कि जवाबदेही सुनिश्चित करने और दूसरों को सबक सिखाने के लिए पुलिस थाना स्तर पर शीर्ष नशा तस्करों की सार्वजनिक रूप से पहचान की जाएगी। नशीली दवाओं की तस्करी का इस्तेमाल आतंकवाद को वित्तपोषित करने और समाज को अस्थिर करने के एक हथियार के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक पड़ोसी देश हमारे युवाओं को खोखला करने के लिए नशीली दवाएं भेज रहा है। यहां पहुंचने वाली हर खेप न केवल जहर है, बल्कि हमारे भविष्य के खिलाफ एक हथियार भी है। उन्होंने प्रवर्तन एजेंसियों को ‘निर्दोषों को परेशान न करें’, लेकिन दोषियों को भागने न दें ” के सिद्धांत अपनाने का निर्देश दिया।

शनिवार को अभियान की शुरुआत करते हुए एलजी ने पूरे जम्मू और कश्मीर में ‘पद यात्रा’ और बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं, नागरिक समाज और सामुदायिक नेताओं से इस आंदोलन की बागडोर अपने हाथों में लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल प्रशासन द्वारा नहीं जीती जा सकती। पूरे समाज को एक साथ आना होगा।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने में महिलाओं, विशेष रूप से माताओं और बहनों की अहम भूमिका है। उनकी जागरूकता पूरे समुदायों को बदल सकती है।

एलजी ने कहा कि अगले 100 दिन बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने एक बहु-आयामी रणनीति की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें बढ़ते नशा संकट को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर गहन जागरूकता अभियान, स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में परामर्श सहायता, गांवों और कस्बों में निरंतर सामुदायिक जुड़ाव और कमजोर वर्गों तक लक्षित पहुंच शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार ने नशा मुक्ति केंद्रों के सही ढंग से काम करने को सुनिश्चित करने के लिए ‘जम्मू-कश्मीर नशा सेवन विकार उपचार, परामर्श और पुनर्वास केंद्र नियम, 2026’ अधिसूचित किए हैं। उन्होंने कहा कि केवल उन्हीं असली केंद्रों को काम करने की अनुमति दी जाएगी जिनके पास पर्याप्त कर्मचारी और सुविधाएं होंगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उपराज्यपाल ने कहा कि नशे की लत से प्रभावित लोगों को उपचार, परामर्श और पुनर्वास के लिए पूरा सहयोग दिया जाएगा। हमें पीड़ितों को सामान्य जीवन में लौटने में मदद करनी चाहिए, साथ ही उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जो उन्हें इस जाल में फंसाते हैं।

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