Last Updated: September 25, 2026

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रेलुराम पूनिया हत्याकांड : सोनिया बोली, चचेरा भाई हड़पना चाहता है संपत्ति

April 14, 2026

रेलुराम पूनिया हत्याकांड : सोनिया बोली, चचेरा भाई हड़पना चाहता है संपत्ति

हिसार। पूर्व विधायक रेलुराम पूनिया हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहीं और फिलहाल जमानत पर रिहा सोनिया ने चचेरे भाई पर संपत्ति हड़पने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उसने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर करते हुए खुद को पीड़ित बताया है।

7 अप्रैल को थी सुनवाई

उसने दावा किया कि पैतृक संपत्ति कब्जाने के लिए उसे जानबूझकर इस केस में फंसाया गया। उसके शरीर में वही जहर मिला जिससे अन्य लोगों की मौत हुई थी। सोनिया और उसके पति संजीव को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 9 दिसंबर 2025 को जमानत पर रिहा किया था। इस फैसले के खिलाफ सोनिया के चचेरे भाई जितेंद्र पूनिया ने जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इस पर 7 अप्रैल को सुनवाई के दौरान अदालत ने सोनिया और संजीव को हलफनामा पेश करने के आदेश दिए थे। जितेंद्र के अधिवक्ता लाल बहादुर खोवाल ने बताया कि अदालत के जरिए शपथ पत्र मिला है। इसमें सोनिया ने खुद को पीड़ित बताया है। सोनिया ने दावा किया कि वह अपने माता-पिता के परिवार की एकमात्र जीवित सदस्य है।

सोनिया ने ये भी किया खुलासा

सोनिया ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता (जितेंद्र) उसे आखिरी सांस तक जेल में रखना चाहता है, जिससे कि वे उसके पिता की करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा कर सके। उसने दावा किया कि याचिकाकर्ता असली पीड़ित नहीं है। सोनिया ने ये भी बताया कि जेल में उसने ब्यूटी पार्लर और सिलाई-कढ़ाई जैसे कोर्स किए हैं। वह रेडियो जॉकी भी बन चुकी हैं और 2021 में तिनका-तिनका बंदिनी अवॉर्ड से सम्मानित की गईं।

क्या था हत्याकांड का पूरा मामला

वर्ष 2001 में बरवाला के पूर्व विधायक रेलुराम पूनिया, उनकी पत्नी कृष्णा देवी, बच्चे प्रियंका, सुनील, बहू शकुंतला, पोता लोकेश और दो पोतियां शिवानी और 45 दिन की प्रीति की लितानी गांव के फार्म हाउस में हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रेलुराम की छोटी बेटी सोनिया और उसके पति संजीव को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई जिसे 6 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया था।

कब-कब क्या हुआ?

वर्ष 2004 में हिसार जिला अदालत ने सोनिया और संजीव को फांसी की सजा सुनाई। वर्ष 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने इस सजा को बरकरार रखा। 6 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की दया याचिका पर फैसला सुनाते हुए फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील करते हुए पूरी जिंदगी जेल में बिताने के आदेश दिए। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 11 दिसंबर 2025 को दोनों को अंतरिम जमानत दी और 16 दिसंबर 2025 को करनाल जेल से रिहा कर दिया।

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