Last Updated: September 22, 2026

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Haryana : सरकारी स्कूल से पांच साल में कम हुए चार लाख विद्यार्थी

April 17, 2026

Haryana : सरकारी स्कूल से पांच साल में कम हुए चार लाख विद्यार्थी

अंबाला। Students dropped from government schools प्रदेश के राजकीय स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम होती जा रही है। यदि बात करें पिछले पांच सालों की तो लगभग चार लाख विद्यार्थियों का राजकीय स्कूलों से मोह भंग हो गया है। ये विद्यार्थी या तो शिक्षा छोड़ चुके हैं या निजी स्कूलों का रुख कर गए हैं। दोनों ही स्थितियो में नुकसान सरकार को हुआ है।

पांच सालों में कम हुई संख्या

आपको बता दें कि यदि पिछले पांच सालों की तुलना की जाए तो राजकीय स्कूलों से लगभग 4,15,086 विद्यार्थी घट गए है। शुरू में इन स्कूलों में बढ़ौत्तरी हुई थी जो बाद में घटती चली गई। ये संख्या कोरोना काल के तुरंत बाद बढ़ी थी। 2023-24 से 2025-26 तक ज्यादातर जिलों में दाखिले कम होते गए। यदि बात करें कक्षावार आंकड़ों की तो पहली से आठवीं कक्षा तक में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। खासकर 2024-25 से 2025-26 के बीच करीब 93 हजार छात्रों की कमी आई और कुल मिलाकर लगभग 2.5% गिरावट दर्ज हुई।

सरकारी स्कूलों में कम हो रहारुझान 

इससे साफ है कि छोटे बच्चों का सरकारी स्कूलों से रुझान कम हो रहा है। कक्षा 9 और 10 में उल्टा ट्रेंड दिख रहा है। कक्षा 9 में करीब 3.4% वृद्धि और कक्षा 10 में लगभग 2.7% वृद्धि दर्ज हुई। इसका मतलब है कि मिडिल के बाद कुछ छात्र फिर से पढ़ाई से जुड़ रहे हैं। कक्षा 11 में हल्की गिरावट (1.4 फीसदी) रही लेकिन कक्षा 12 में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी (करीब 19 फीसदी) दर्ज हुई। कुल मिलाकर सीनियर सेकेंडरी (9-12) में बढ़ोतरी और प्राइमरी (1-8) में गिरावट का ट्रेंड साफ दिख रहा है।

माता-पिता का निजी स्कूलों की रुझान

सरकारी स्कूलों में दाखिले घटने के पीछे कई वजहें हैं। सबसे बड़ा कारण निजी स्कूलों की ओर बढ़ता रुझान है। जहां माता-पिता बेहतर अंग्रेजी माध्यम और सुविधाएं देखते हैं। दूसरी वजह छोटे बच्चों का प्राइवेट प्ले स्कूल और नर्सरी में जाना है। कई जगह सरकारी स्कूलों में शिक्षक कमी, आधारभूत सुविधाओं की कमी और पुराने ढांचे भी असर डालते हैं। शहरी इलाकों में खासकर यह ट्रेंड ज्यादा दिख रहा है। साथ ही, परिवारों की आय बढ़ने से निजी शिक्षा की ओर झुकाव भी बढ़ा है।

दाखिले बढ़ाने का हो रहा प्रयास

शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय दहिया ने बताया कि विभाग दाखिले बढ़ाने के लिए लगातार अभियान चला रहा है। स्कूल चलें हम जैसे नामांकन अभियान के तहत घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल से जोड़ा जा रहा है। स्कूलों में स्मार्ट क्लास, ड्यूल डेस्क, मुफ्त किताबें, ड्रेस और मिड-डे मील जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। इसके अलावा मेरिट आधारित स्कॉलरशिप और डिजिटल शिक्षा पर भी जोर है। कई जिलों में विशेष ड्राइव चलाकर ड्रॉपआउट बच्चों को वापस लाने की कोशिश हो रही है। सरकार का फोकस अब शुरुआती कक्षाओं में दाखिला बढ़ाने पर ज्यादा है।

कुछ इस तरह गिरा आंकड़ा

यदि बात करें अंबाला के राजकीय स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों का तो यहां 2021-22 में 87,663 बच्चे थे जो 2025-26 में 71,963 रह गए। भिवानी में एक आंकड़ा 1,20,220 था जो अब 82,958 तक सीमित हो गया। फरीदाबाद में पांच साल पहले 1,35,819 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे थे जो अब 1,13,550 रह गए। फतेहाबाद में 1,24,121 बच्चे थे जो पांच साल बाद 95,030 रह गए। हिसार जैसे शहर में ये आंकड़ा 1,68,200 था जो अब 1,23,867 रह गया। यदि बात करें जींद की तो यहां पांच साल पहले 1,33,336 बच्चे सरकारी स्कूलों से शिक्षा ग्रहण कर रहे थे जो पांच साल के बाद 1,00,481 रह गए।

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