वाशिंगटन/इस्लामाबाद: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यस्थ देश पाकिस्तान के अनुरोध पर ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया है। ट्रंप ने कहा कि यह कदम तेहरान के आंतरिक मतभेदों से जूझ रहे नेतृत्व को सात सप्ताह से जारी युद्ध समाप्त करने के लिए एक प्रस्ताव तैयार करने का समय देने के उद्देश्य से उठाया गया है। यह घोषणा तब की गई है, जब आठ अप्रैल को घोषित दो सप्ताह का युद्धविराम कुछ ही घंटों में समाप्त होने वाला था। इसके साथ ही उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की इस्लामाबाद यात्रा भी प्रभावी रूप से टल गई, जहां ईरानी प्रतिनिधियों के साथ शांति वार्ता प्रस्तावित थी।
हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका ईरान पर अपने हमले को तब तक रोकेगा, जब तक उसके नेता और प्रतिनिधि समेकित प्रस्ताव तैयार नहीं कर लेते। उन्होंने कहा कि ईरान के बंदरगाहों पर आर्थिक नाकेबंदी जारी रहेगी। वेंस और अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ तथा जेरेड कुशनर को मंगलवार को इस्लामाबाद रवाना होना था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल की ”पाकिस्तान यात्रा मंगलवार को नहीं होगी।”
ट्रंप ने मंगलवार को एक बयान में कहा, ”इस तथ्य के आधार पर कि ईरान की सरकार गंभीर रूप से आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर तथा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुरोध पर हमसे कहा गया है कि हम ईरान पर अपने हमले को तब तक रोकें, जब तक उसके नेता और प्रतिनिधि समेकित प्रस्ताव तैयार नहीं कर लेते।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने ”इसलिए अपनी सेना को नाकेबंदी जारी रखने तथा अन्य सभी मामलों में पूरी तरह तैयार और सक्षम रहने का निर्देश दिया है और युद्धविराम को तब तक बढ़ाया जाएगा, जब तक उनका प्रस्ताव पेश नहीं हो जाता और बातचीत किसी न किसी नतीजे पर नहीं पहुंच जाती।”
अमेरिका की आलोचना करते हुए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी ”युद्ध की कार्रवाई है और युद्धविराम का उल्लंघन है।” उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ”किसी वाणिज्यिक जहाज पर हमला करना और उसके चालक दल को बंधक बनाना इससे भी बड़ा उल्लंघन है। ईरान जानता है कि प्रतिबंधों को कैसे निष्प्रभावी करना है, अपने हितों की रक्षा कैसे करनी है और दबाव व धमकी का मुकाबला कैसे करना है।”
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाने पर ट्रंप का आभार जताया और उम्मीद जतायी कि दोनों पक्ष “व्यापक शांति समझौते” तक पहुंचेंगे। ट्रंप की घोषणा के बाद शरीफ ने ‘एक्स’ पर लिखा, ”मैं व्यक्तिगत रूप से और फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप का तहे दिल से धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ने देने के लिए युद्धविराम बढ़ाने के हमारे अनुरोध को स्वीकार किया।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पर जताए गए ”विश्वास और भरोसे के साथ वह बातचीत से संघर्ष के समाधान के लिए गंभीर प्रयास जारी रखेगा।”
शरीफ ने कहा, ”मुझे पूरी उम्मीद है कि दोनों पक्ष युद्धविराम का पालन करना जारी रखेंगे और इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता के दूसरे दौर के दौरान संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए एक व्यापक ‘शांति समझौते’ पर पहुंचने में सक्षम होंगे।” इस बीच, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान, तुर्किये और संयुक्त अरब अमीरात स्थित 14 व्यक्तियों, संस्थाओं और विमानों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। उन पर ईरानी शासन की ओर से हथियार या हथियारों के पुर्जों की खरीद-फरोख्त और उनके परिवहन में शामिल होने का आरोप है।
इस्लामाबाद में 11 और 12 अप्रैल को हुई अमेरिका-ईरान वार्ता का पहला दौर किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सका, जिसके बाद मेजबान पाकिस्तान ने तनाव कम करने तथा एक और दौर की बातचीत की उम्मीद फिर से जगाने के लिए तेज कूटनीतिक प्रयास शुरू किए। वार्ता को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इसहाक डार ने मंगलवार को दोनों पक्षों से दो सप्ताह के युद्धविराम को बढ़ाने और कूटनीति को मौका देने की अपील की। ईरान युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमलों के साथ हुई थी।