Last Updated: October 6, 2026

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72 हजार करोड़ के पार पहुंचा भारत का सीफूड एक्सपोर्ट, फ्रोजन झींगे का सबसे बड़ा योगदान

April 22, 2026

72 हजार करोड़ के पार पहुंचा भारत का सीफूड एक्सपोर्ट, फ्रोजन झींगे का सबसे बड़ा योगदान

बिजनेस डेस्क: भारत सीफूड निर्यात के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। MPEDA द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश का सीफूड एक्सपोर्ट बढ़कर 8.28 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 72,000 करोड़ रुपये) तक पहुंच गया है। साथ ही कुल निर्यात मात्रा भी बढ़कर 19.32 लाख मीट्रिक टन हो गई है। इस तेजी से बढ़ोतरी के चलते भारत अब वैश्विक सीफूड बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी बनता जा रहा है।

झींगा बना सबसे बड़ा ताकतवर उत्पाद

भारत के सीफूड निर्यात में सबसे बड़ा योगदान झींगे का है। कुल 72,000 करोड़ रुपये के निर्यात में से लगभग 47,973 करोड़ रुपये (5.51 अरब डॉलर) सिर्फ फ्रोजन झींगे से आया हैं। यह कुल कमाई का दो-तिहाई से ज्यादा हिस्सा है। झींगा निर्यात की मात्रा में 4.6% की बढ़ोतरी हुई है। कीमत में 6.35% का इजाफा हुआ है। इससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय झींगे की मांग लगातार बढ़ रही है।

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किन देशों में बढ़ी मांग

भारत से भेजे जाने वाले समुद्री उत्पादों की मांग दुनिया के कई बड़े बाजारों में बढ़ रही है। संयुक्त राज्य अमेरिका अब भी सबसे बड़ा खरीदार है, हालांकि यहां थोड़ी गिरावट दर्ज की गई। चीन दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन गया है, जहां निर्यात में तेज बढ़ोतरी हुई। यूरोपीय संघ में निर्यात मूल्य और मात्रा दोनों में बड़ी बढ़त देखी गई। दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में भी मांग तेजी से बढ़ी। जापान को निर्यात में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। ये आंकड़े दिखाते हैं कि भारत का सीफूड सेक्टर वैश्विक स्तर पर मजबूत हो रहा है।

किन उत्पादों में बढ़ोतरी

सीफूड निर्यात में कई उत्पादों की मांग बढ़ी है। फ्रोजन मछली, स्क्विड और कटलफिश, सूखे समुद्री खाद्य, जिंदा समुद्री उत्पाद, सुरिमी, मछली का चारा और मछली के तेल के निर्यात में भी सुधार देखा गया है। हालांकि, कुछ ठंडे उत्पादों में थोड़ी गिरावट आई है।

अर्थव्यवस्था को मिल रहा फायदा

सीफूड एक्सपोर्ट में यह बढ़ोतरी देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे मछली पालन और इससे जुड़े कारोबार में लगे करीब 3 करोड़ लोगों को सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यही रफ्तार बनी रही, तो भारत आने वाले समय में वैश्विक सीफूड बाजार में और बड़ी ताकत बन सकता है।

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