Last Updated: September 21, 2026

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Mohini Ekadashi Vrat 2026: पहली बार व्रत रखने वाले जानें नियम, पूजा विधि और महत्व

April 26, 2026

Mohini Ekadashi Vrat 2026: पहली बार व्रत रखने वाले जानें नियम, पूजा विधि और महत्व

Mohini Ekadashi Vrat 2026: वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे मोहिनी एकादशी कहा जाता है, इस वर्ष 27 अप्रैल (सोमवार) को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। भगवान विष्णु को समर्पित यह पावन व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और पापों के नाश का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

पहली बार व्रत रखने वालों के लिए क्यों जरूरी जानकारी

जो श्रद्धालु पहली बार मोहिनी एकादशी का व्रत रखने जा रहे हैं, उनके लिए इसके नियमों और विधि को समझना बेहद जरूरी है, ताकि व्रत पूर्ण फलदायी हो सके और किसी प्रकार की त्रुटि न हो।

मोहिनी एकादशी का धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के दौरान मोहिनी अवतार धारण कर देवताओं को अमृत प्रदान किया था और असुरों को वंचित रखा था। तभी से इस एकादशी का नाम मोहिनी एकादशी पड़ा। यह व्रत पापों के नाश और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग माना जाता है।

पौराणिक कथा से मिलता है जीवन परिवर्तन का संदेश

धार्मिक कथाओं में वर्णन मिलता है कि धनपाल नामक वैश्य का पुत्र गलत संगति में पड़कर पाप कर्मों में लिप्त हो गया था। बाद में एक ऋषि के मार्गदर्शन पर उसने मोहिनी एकादशी का व्रत किया, जिससे उसका जीवन पूरी तरह बदल गया और उसे आत्मिक शांति प्राप्त हुई।

व्रत की सही विधि और नियम

मोहिनी एकादशी का व्रत दशमी तिथि से ही शुरू माना जाता है। इस दिन केवल एक समय सात्विक भोजन करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। एकादशी के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु की पूजा करें। कुछ श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना भी करते हैं।

दिनभर फलाहार या निर्जल व्रत रखा जाता है। फल के रूप में सेब, केला, अमरूद और अनार का सेवन किया जा सकता है। कुछ लोग कुट्टू के आहार का भी प्रयोग करते हैं।

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व्रत के दौरान किन बातों का रखें ध्यान

इस दिन क्रोध, निंदा, झूठ और विवाद से दूर रहना चाहिए। पूरे दिन भगवान विष्णु के मंत्र
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

शाम के समय भजन-कीर्तन और जागरण करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। व्रत का समापन द्वादशी तिथि पर विधिपूर्वक पूजा और पारण के साथ किया जाता है।

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