Today Hukamnama 27 April 2026: सोरठि महला ५ घरु १ तितुके ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ किस हउ जाची किसु आराधी जा सभु को कीता होसी ॥ जो जो दीसै वडा वडेरा सो सो खाकू रलसी ॥ निरभउ निरंकारु भव खंडनु सभि सुख नव निधि देसी ॥१॥ हरि जीउ तेरी दाती राजा ॥ माणसु बपुड़ा किआ सालाही किआ तिस का मुहताजा ॥ रहाउ ॥ जिनि हरि धिआइआ सभु किछु तिस का तिस की भूख गवाई ॥ अैसा धनु दीआ सुखदातै निखुटि न कब ही जाई ॥ अनदु भइआ सुख सहजि समाणे सतिगुरि मेलि मिलाई ॥२॥ मन नामु जपि नामु आराधि अनदिनु नामु वखाणी ॥ उपदेसु सुणि साध संतन का सभ चूकी काणि जमाणी ॥ जिन कउ क्रिपालु होआ प्रभु मेरा से लागे गुर की बाणी ॥३॥ कीमति कउणु करै प्रभ तेरी तू सरब जीआ दइआला ॥ सभु किछु कीता तेरा वरतै किआ हम बाल गुपाला ॥ राखि लेहु नानकु जनु तुमरा जिउ पिता पूत किरपाला ॥४॥१॥
Today Hukamnama 27 April 2026 अर्थ: हे प्रभू जी! मैं तेरी (दी हुई) दातों से (ही) तृप्त हो सकता हूँ, मैं किसी विचारे मनुष्य की उपमा क्यों करता फिरूँ? जो भी कोई बड़ा अथवा धनाढ मनुष्य दिखाई देता है, हरेक ने (मर के) मिट्टी में मिल जाना है (एक परमात्मा ही सदा कायम रहने वाला दाता है)। हे भाई! सारे सुख और जगत के सारे नौ खजाने वह निरंकार ही देने वाला है जिसको किसी का डर नहीं, और, जो सब जीवों का जनम-मरण व नाश करने वाला है।1। हे भाई! जिस मनुष्य ने परमात्मा की भक्ति शुरू कर दी, जगत की हरेक चीज ही उसकी बन जाती है, परमात्मा उसके अंदर से (माया की) भूख दूर कर देता है। सुखदाते प्रभू ने उसको ऐसा (नाम-) धन दे दिया है जो (उसके पास से) कभी खत्म नहीं होता। गुरू ने उस परमात्मा के चरणों में (जब) मिला दिया, तो आत्मिक अडोलता के कारण उसके अंदर आनंद के सारे सुख आ बसते हैं।2। हे (मेरे) मन! हर समय परमात्मा का नाम जपा कर, सिमरा कर, उचारा कर। संत जनों का उपदेश सुन के जमों की भी सारी मुथाजी (गुलामी) खत्म हो जाती है। (पर, हे मन!) सतिगुरू की बाणी में वही मनुष्य सुरति जोड़ते हैं, जिन पर प्यारा प्रभू आप दयावान होता है।3। हे प्रभू! तेरी (मेहर की) कीमत कौन पा सकता है? तू सारे ही जीवों पर मेहर करने वाला है। हे गोपाल प्रभू! हम जीवों की क्या बिसात है? जगत में हरेक काम तेरा ही किया हुआ होता है। हे प्रभू! नानक तेरा दास है, (इस दास की) रक्षा उसी तरह करता रह, जैसे पिता अपने पुत्रों पर कृपालु हो के करता है।4।1।
मेष: दिन शुभ रहेगा...