Last Updated: October 12, 2026

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टैगोर थिएटर में प्रमुख नागरिक संगोष्ठी, Pradeep Joshi बोले- मानसिक परिवर्तन से ही संभव है सामाजिक बदलाव

April 28, 2026

टैगोर थिएटर में प्रमुख नागरिक संगोष्ठी, Pradeep Joshi बोले- मानसिक परिवर्तन से ही संभव है सामाजिक बदलाव

चंडीगढ़: टैगोर मिनी थिएटर में मंगलवार को पुस्तक विमोचन एवं प्रमुख नागरिक गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी और सेवानिवृत्त न्यायाधीश परमजीत सिंह धालीवाल ने व्याख्यान दिया तथा पुस्तक संघर्ष का समाधान पंजाब अध्याय का विमोचन किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदीप जोशी ने कहा कि संघ का कार्य केवल संगठन खड़ा करना नहीं बल्कि मानसिक परिवर्तन के माध्यम से सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा विचार, व्यवहार और संस्कार की यात्रा है और शाखा के माध्यम से अनुशासन, सामूहिकता और विकास के मूल्यों को सिखाया जा रहा है। उन्होंने स्वदेशी, समरसता और सुरक्षा को समाज में आत्मसात करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

जोशी ने कहा कि भारत का समाज सदैव गुण आधारित रहा है और संघ का प्रयास है कि वे गुण पुनः स्थापित हों। उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने अनेक आक्रमण और गुलामी के दौर देखे, लेकिन हर कालखंड में समाज ने स्वयं को पुनर्स्थापित किया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब रावण का काल आया तो राम, कंस के समय कृष्ण और मुगलों और औरंगजेब के समय गुरु साहिबान,महाराणा प्रताप, वीर छत्रसाल, छत्रपति शिवाजी और बंदा सिंह बहादुर जैसे महान व्यक्तित्व सामने आए।

उन्होंने कहा कि बीते सौ सवा सौ वर्षों में देश में दो प्रकार की विचारधाराएं स्पष्ट रूप से सामने आई हैं। एक ओर राष्ट्रवादी सोच रही, वहीं दूसरी ओर विभाजनकारी प्रवृत्तियां भी उभरीं। उन्होंने बंगाल विभाजन, मुस्लिम लीग की स्थापना और डायरेक्ट एक्शन जैसे घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सबने समाज को प्रभावित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विचारधाराओं ने आक्रांताओं तक का महिमामंडन करने का काम किया और भारतीय आदर्शों को कमजोर करने का प्रयास किया।


जोशी ने कहा कि आज भी भ्रम फैलाने और समाज में दुविधा पैदा करने की कोशिशें हो रही हैं, ऐसे समय में इस पुस्तक का महत्व और बढ़ जाता है। उन्होंने पंजाब की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य वर्तमान में पहचान, अखंडता और सुरक्षा जैसे तीन बड़े संकटों से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि समाज की एकता और एकात्मता किसी भी स्थिति में टूटनी नहीं चाहिए।

उन्होंने नशा, धर्म परिवर्तन और सामाजिक विघटन को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि इन समस्याओं का लगातार आंकलन और समाधान आवश्यक है,मगर सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति तटस्थ वर्ग से बनी है।उनको सक्रिय करना बेहद आवश्यक है, क्योंकि इनकी निष्क्रियता खतरनाक हो सकती है। महाभारत का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अर्जुन की तरह खड़ा होना होगा और समाज के लिए सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

कार्यक्रम में बोलते हुए परमजीत सिंह धालीवाल ने कहा कि भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि एक विचार, संस्कार और जीवन दृष्टि है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया संघर्ष और आर्थिक संकट से जूझ रही है, जबकि भारतीय परंपरा पूरी मानवता को एक मानती है और सेवा का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि गीता सहित हमारे धार्मिक ग्रंथ सिखाते हैं कि समस्याओं का समाधान प्रेम और संवाद से संभव है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे महान देश ने आरंभ से ही पूरे विश्व एक परिवार माना है।

उन्होंने कहा कि भारत विश्व का नेतृत्व कर सकता है, क्योंकि यह देश केवल जनसंख्या नहीं, बल्कि मूल्यों और लोकतंत्र की शक्ति है। उन्होंने शिक्षा प्राप्त लोगों से समाज और राष्ट्र के लिए योगदान देने का आह्वान किया और कहा कि सेवा भावना ही वास्तविक प्रगति का आधार है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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