Last Updated: October 1, 2026

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शीत्सांग ने जारी की कृषि सांस्कृतिक विरासत की पहली आधिकारिक सूची

May 6, 2026

शीत्सांग ने जारी की कृषि सांस्कृतिक विरासत की पहली आधिकारिक सूची

हाल ही में शीत्सांग (तिब्बत) स्वायत्त प्रदेश की जन सरकार द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में “शीत्सांग की कृषि सांस्कृतिक विरासत की सूची” आधिकारिक रूप से जारी की गई। शीत्सांग में कृषि सांस्कृतिक विरासत को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने वाला यह पहला मोनोग्राफ है। इस “सूची” में पठारी विशेषताओं वाली 28 कृषि सांस्कृतिक विरासत परियोजनाओं का विवरण दिया गया है। 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस “सूची” के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया और चयन से जुड़े मानदंडों को स्पष्ट किया गया। साथ ही, विरासत संरक्षण और उसके आधुनिक उपयोग के रास्तों पर भी सुझाव दिए गए। इसका उद्देश्य शीत्सांग की कृषि सभ्यता की परंपराओं को आगे बढ़ाना और ग्रामीण पुनरुद्धार को नई ऊर्जा देना है।

शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के कृषि एवं ग्रामीण मामले विभाग के उप प्रमुख फू चंगश्वे ने कहा कि “शीत्सांग की कृषि सांस्कृतिक विरासत की सूची” का प्रकाशन, कृषि सांस्कृतिक विरासत संसाधनों के संरक्षण, खोज, संवर्धन और उपयोग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने इसे एक नए आरंभिक चरण की शुरुआत भी बताया।

उन्होंने कहा कि भविष्य में शीत्सांग, कृषि सांस्कृतिक विरासत के उत्खनन, संकलन, पहचान, संरक्षण और तर्कसंगत उपयोग को लगातार बढ़ावा देता रहेगा, ताकि इन बहुमूल्य सांस्कृतिक धरोहरों को नए युग में फिर से जीवंत बनाया जा सके। इससे ग्रामीण पुनरुद्धार और कृषि तथा ग्रामीण आधुनिकीकरण को मजबूत सांस्कृतिक आधार मिलेगा।

उधर, शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश कृषि विज्ञान अकादमी के उप निदेशक और कृषि सांस्कृतिक विरासत विशेषज्ञ पासांग वांगत्वे ने बताया कि शीत्सांग अपने अनोखे पठारी भूगोल और समृद्ध जातीय संस्कृति के कारण दुनिया की सबसे ऊंचाई पर स्थित और सबसे विशिष्ट जीवित कृषि सांस्कृतिक विरासत प्रणालियों में से एक को संजोए हुए है। 

उन्होंने कहा कि इसमें कृषि उत्पादन, घास के मैदानों की खानाबदोश संस्कृति और पठारी कृषि परिदृश्य जैसी कई परंपरागत प्रणालियां शामिल हैं, जो आज भी व्यवहार में हैं। उनके अनुसार, इस “सूची” का संकलन और प्रकाशन केवल शीत्सांग की कृषि सांस्कृतिक विरासत की “पारिवारिक सूची” भर नहीं है, बल्कि यह संरक्षण और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक भी है। साथ ही, इसका वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में भी बड़ा महत्व है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग) 

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