Last Updated: September 24, 2026

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स्काईरूट एयरोस्पेस ने रचा इतिहास, भारत का पहला स्पेस-टेक यूनिकॉर्न बना

May 7, 2026

स्काईरूट एयरोस्पेस ने रचा इतिहास, भारत का पहला स्पेस-टेक यूनिकॉर्न बना

स्पेस-टेक स्काईरूट एयरोस्पेस ने गुरुवार को 60 मिलियन डॉलर (भारतीय रुपए में करीब 570 करोड़ रुपए) जुटाने का ऐलान किया है। इसके साथ कंपनी देश की पहली स्पेस-टेक स्टार्टअप यूनिकॉर्न बन गई है।

मौजूदा फंडिंग राउंड में स्काईरूट की वैल्यूएशन 1.1 अरब डॉलर रही है, जो कि 2023 में कंपनी की वैल्यू से 519 मिलियन डॉलर से करीब चार गुना ज्यादा है। नई फंडिंग मिलना दिखाता है कि भारत का निजी स्पेस सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

जब भी किसी स्टार्टअप का वैल्यूएशन एक अरब डॉलर से अधिक हो जाता है तो उसे यूनिकॉर्न माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में अलग-अलग सेक्टर्स से करीब 100 से अधिक यूनिकॉर्न मौजूद हैं।

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हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक और सीईओ पवन कुमार चंदना ने कहा,“हम स्काईरूट में आगामी विक्रम-1 प्रक्षेपण को लेकर बेहद उत्साहित हैं, जो भारत का पहला निजी कक्षीय रॉकेट है और भारत तथा वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। नया निवेश स्काईरूट में दुनिया के कुछ सबसे प्रतिष्ठित निवेशकों के विश्वास का संकेत है।”

स्काईरूट एयरोस्पेस के इस फंडिंग राउंड में कई वैश्विक निवेशकों जैसे जीआईसी और ब्लैकरॉक आदि का नाम शामिल है। यह दिखाता है कि भारत के स्पेस सेक्टर में वैश्विक निवेशक रुचि ले रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अब तक के अलग-अलग फंडिंग राउंड में निवेशकों से 160 मिलियन डॉलर (करीब 1,500 करोड़ रुपए) जुटा चुकी है।

कंपनी ने 2023 में एक ऑर्बिटल लॉन्च किया था और अब आने वाले हफ्तों में एक और लॉन्च की तैयारी कर रही है।

कंपनी ने बताया कि इस नई पूंजी से स्काईरूट को विक्रम-1 के प्रक्षेपणों को तेज गति से स्थापित करने, उत्पादन बढ़ाने और विक्रम-2 (एक उन्नत क्रायोजेनिक चरण द्वारा संचालित 1 टन श्रेणी का प्रक्षेपण यान) विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे यह अपने मिशनों और ग्राहकों की सेवा करने की क्षमता का विस्तार कर सकेगी।

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