Hukamnama 14 May 2026: सूही महला ५ ॥ अनिक बींग दास के परहरिआ ॥ करि किरपा प्रभि अपना करिआ ॥१॥ तुमहि छडाइ लीओ जनु अपना ॥ उरझि परिओ जालु जगु सुपना ॥१॥ रहाउ ॥ परबत दोख महा बिकराला ॥ खिन महि दूरि कीए दइआला ॥२॥ सोग रोग बिपति अति भारी ॥ दूरि भई जपि नामु मुरारी ॥३॥ द्रिसटि धारि लीनो लड़ि लाइ ॥ हरि चरण गहे नानक सरणाइ ॥४॥२२॥२८॥
Hukamnama 14 May 2026 अर्थ: प्रभु ने अपने सेवकों के अनेकों विघन दूर कर दिए, और कृपा कर के उस को अपना बना लिया है॥१॥ हे प्रभु! तूं अपने सेवकों को (उस मोह जाल में से) आप निकल लिया, जो स्वपन जैसे जगत (का मोह) जाल (तेरे सेवक के चारो तरफ) बन गया था॥१॥रहाउ॥ (सरन आये मनुख के ) पहाड़ों जितने बड़े और भयानक कर्म-बुराइयाँ दीनो ऊपर दया करने वाले परमात्मा ने एक पल में दूर कर दिए॥२॥ (सेवकों के) अनेकों गम रोग, बड़ी भरी मुसीबतें-परमात्मा का नाम जप कर दूर हो गयी॥३॥ परमात्मा ने मेहर की नज़र कर के उस मनुख को अपने लड़ लगा लिया, हे नानक! जिस ने परमात्मा के चरण पकड़ लिए, जो मनुख प्रभु की सरन आ पड़ा॥४॥२२॥२८॥