
एंटरटेनमेंट डेस्क (फरीद शेख): कहानी पूरी तरह नई नहीं लगती। वही पुराने अंदाज़ वाला प्यार, नेता का बेटा, भाग-दौड़, गलतफहमियां और कन्फ्यूजन से भरी घटनाएं देखने को मिलती हैं। कई जगह फिल्म आपको पुरानी दोस्ती और भ्रम वाली फिल्मों की याद दिलाती है, लेकिन यहां कहानी में वह दम नजर नहीं आता जो दर्शकों को आखिर तक बांधे रख सके।
फिल्म में प्रजापति पांडे वन विभाग के अधिकारी के किरदार में नजर आते हैं, जो दोस्ती निभाने के चक्कर में ऐसी परिस्थितियों में फंस जाते हैं जहां से लगातार हास्य पैदा करने की कोशिश की जाती है। मगर कमजोर लेखन की वजह से वह प्रभाव नहीं बन पाता जिसकी उम्मीद की जाती है।
सबसे बड़ी कमी फिल्म की भाषा और लोकल टोन में महसूस होती है। कहानी प्रयागराज और यूपी की पृष्ठभूमि पर आधारित है, लेकिन कलाकार वहां की भाषा, लहजा और संस्कृति को पूरी तरह पकड़ नहीं पाए। जब किसी शहर या इलाके की कहानी दिखाई जाती है तो वहां की बोली, रहन-सहन और अंदाज़ को सही तरीके से अपनाना बेहद जरूरी होता है, और यही चीज फिल्म में मिसिंग महसूस होती है।
Ayushmann Khurrana अपनी कॉमिक टाइमिंग और अलग तरह की फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस फिल्म में उनका हास्य पूरी तरह असर छोड़ने में नाकाम दिखाई देता है। फिल्म में कॉमेडी पैदा करने की काफी कोशिश की गई है, मगर ज्यादातर जोक्स मजबूर और बेअसर लगते हैं, जिनसे दर्शक जुड़ ही नहीं पाते। फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्टारकास्ट है। Sara Ali Khan, Rakul Preet Singh और Wamiqa Gabbi जैसी ग्लैमरस अभिनेत्रियों की मौजूदगी फिल्म को आकर्षक जरूर बनाती है, लेकिन सिर्फ ग्लैमर के दम पर कहानी को लंबे समय तक संभालना मुश्किल हो जाता है।

कुल मिलाकर, पति पत्नी और वो दो एक ऐसी फिल्म बनकर सामने आती है जो न तो कॉमेडी में पूरी तरह सफल हो पाती है और न ही इमोशनल कनेक्शन बना पाती है। ग्लैमर और स्टार पावर होने के बावजूद फिल्म दर्शकों से जुड़ने में कमजोर साबित होती है।
अगर एक्टिंग की बात करें तो Ayushmann Khurrana अपनी तरफ से पूरी मेहनत करते नज़र आते हैं। स्क्रीन पर उनकी एनर्जी और कॉमिक टाइमिंग साफ दिखाई देती है, लेकिन कमजोर राइटिंग और ढीले कंटेंट की वजह से कई जोक्स असर नहीं छोड़ पाते और हंसी कम ही आती है।
Rakul Preet Singh अपने किरदार के साथ पूरा इंसाफ करती दिखाई देती हैं। उनकी एक्टिंग और अनुभव दोनों ही पर्दे पर साफ झलकते हैं। फिल्म में उन्होंने निलोफर का किरदार निभाया है और उस रोल पर अच्छी पकड़ बनाई है।
वहीं Wamiqa Gabbi कुछ जगहों पर एक जैसे एक्सप्रेशन देती नज़र आती हैं। उनकी स्क्रीन प्रेज़ेंस अच्छी है, लेकिन एक्टिंग में अभी और निखार की जरूरत महसूस होती है।
और अब बात Sara Ali Khan की …अपनी शानदार स्क्रीन प्रेज़ेंस से हर सीन में अलग ही ऊर्जा भर दी है। उनका ग्लैमरस अंदाज़, आत्मविश्वास से भरी डायलॉग डिलीवरी और नैचुरल एक्सप्रेशन्स दर्शकों का ध्यान पूरी तरह अपनी ओर खींचते हैं। पूरी कास्ट की मेहनत के बावजूद यह फिल्म दर्शकों से जुड़ नहीं पाएगी, क्योंकि कहानी में दम नहीं है। वही पुरानी चीज़ को सिर्फ नई पैकेजिंग में पेश करके दर्शकों को परोस दिया गया है।
Dainik Savera Times इस फिल्म को 2 स्टार रेटिंग देता है।
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