पंजाब में पिछले चार वर्षों में कानून लागू करने वाली एजेंसियों को काफी मजबूत किया गया है। नशा तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ लगातार कार्रवाई के कारण पूरे राज्य में बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुई हैं, संपत्तियां जब्त की गई हैं और आपराधिक नेटवर्क को कमजोर किया गया है।
अनौपचारिक आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने नशा के खिलाफ “जीरो-टॉलरेंस” नीति अपनाई है। इसके तहत 2022 से अब तक नशा तस्करी और सप्लाई में शामिल 95,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
एनडीपीएस अधिनियम के तहत हजारों एफआईआर दर्ज की गई हैं, जो नशा नेटवर्क को खत्म करने की मुहिम में तेजी को दर्शाती हैं। अधिकारियों के अनुसार, एनफोर्समेंट एजेंसियों ने हेरोइन, अफीम और सिंथेटिक ड्रग्स सहित बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त किए हैं और नशा कारोबार की वित्तीय रीढ़ को भी निशाना बनाया है।
नशा तस्करों से जुड़ी 770 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की गई है और 1,500 से ज्यादा आरोपियों की अवैध संपत्ति को भी जब्त किया गया है। पंजाब सरकार का नशा-विरोधी अभियान“युद्ध नशे विरुद्ध” इन प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिसमें खुफिया-आधारित पुलिसिंगऔर समन्वित फील्ड ऑपरेशन शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि इस अभियान ने न केवल सप्लाई चेन को बाधित किया है, बल्कि कई बड़े तस्करी नेटवर्क की गतिविधियों पर भी रोक लगाई है।
संगठित अपराध के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई जारी है। एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स ने इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसमें हजारों गैंग सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है और 1,000 से अधिक आपराधिक गिरोहों का भंडाफोड़ किया गया है।
इस दौरान अपराध में इस्तेमाल होने वाले हथियार और वाहन भी बरामद किए गए हैं और कई उच्च प्रोफ़ाइल मामलों को सुलझाया गया है। बॉर्डर सुरक्षा को भी मजबूत किया गया है , जिससे कि सीमा पार से होने वाली तस्करी को रोका जा सके।
पंजाब में पाकिस्तान से अवैध नशा और हथियारों की तस्करी रोकने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम लागू किए गए हैं। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सैकड़ों ड्रोन और संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया गया है, जो तकनीकी निगरानी क्षमता में सुधार को दर्शाता है।
इसके अलावा, पंजाब में पुलिस आधुनिकीकरण और मानव संसाधन पर भी बड़ा निवेश किया गया है। हाल के वर्षों में हजारों नए पुलिसकर्मियों की भर्ती हुई है और तेज प्रतिक्रिया तथा बेहतर संचालन के लिए नई गाड़ियां और उपकरण शामिल किए गए हैं। रोड सेफ्टी फोर्स, एक विशेष हाईवे पेट्रोल यूनिट, की शुरुआत से सड़क सुरक्षा में सुधार हुआ है। हजारों किलोमीटर सड़कों पर निगरानी से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आई है और आपातकालीन सहायता तेजी से उपलब्ध कराई गई है। सेफ सिटी प्रोजेक्ट्स के माध्यम से शहरी पुलिसिंग को मजबूत किया गया है और कई जिलों में उन्नत निगरानी प्रणाली लागू की गई है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा और अपराध रोकथाम में सुधार हुआ है।
अधिकारियों का मानना है कि सख्त प्रवर्तन, तकनीकी प्रगति और संस्थागत मजबूती पर एक साथ ध्यान देने से कानून व्यवस्था में जनता का भरोसा धीरे-धीरे बहाल हो रहा है। नशा और संगठित अपराध के खिलाफ व्यापक कार्रवाई से राज्य में सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने का प्रयास जारी है।