Last Updated: October 13, 2026

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Nautapa 2026: इस दिन से लगने वाला है नौतपा, भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना…

May 19, 2026

Nautapa 2026: इस दिन से लगने वाला है नौतपा, भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना…

नेशनल डेस्कः उत्तर भारत में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है और आने वाले दिनों में गर्मी और अधिक प्रचंड रूप दिखा सकती है। इसका मुख्य कारण ‘नौतपा’ को माना जाता है। नौतपा वह अवधि होती है जब सूर्य अपने सबसे उग्र स्वरूप में होता है। इस दौरान सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, जिससे तापमान में तेज वृद्धि होती है और भीषण गर्मी के साथ लू चलने लगती है। यह खगोलीय घटना हर वर्ष घटित होती है।

इस वर्ष सूर्य देव 25 मई को दोपहर 3:37 बजे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 8 जून को दोपहर 1:33 बजे तक, यानी लगभग 15 दिनों तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। हालांकि, सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के शुरुआती 9 दिनों को विशेष रूप से ‘नौतपा’ कहा जाता है। इसके बाद 8 जून को सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 15 जून को मिथुन राशि में गोचर करेंगे।

नौतपा क्या है?

नौतपा का अर्थ है सूर्य का लगातार नौ दिनों तक अपने सर्वोच्च ताप पर रहना। इस दौरान गर्मी अपने चरम पर होती है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, नौतपा शुक्ल पक्ष में आर्द्रा नक्षत्र से शुरू होकर अगले 9 नक्षत्रों तक प्रभावी रहता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर बार नौतपा में अत्यधिक गर्मी ही पड़े। मान्यता है कि आर्द्रा के बाद आने वाले 10 नक्षत्रों में सूर्य जिस नक्षत्र में सबसे अधिक ताप देता है, वहां बाद में अच्छी वर्षा होती है। इस वर्ष नौतपा 25 मई से शुरू होकर 3 जून तक रहेगा। इस दौरान तेज हवाएं, बवंडर और कहीं-कहीं बारिश की संभावना भी बनी रह सकती है।

नौतपा में बारिश होने का क्या संकेत है?

लोक मान्यताओं के अनुसार, यदि नौतपा के पूरे नौ दिन अच्छी तरह तपते हैं, तो आगे चलकर अच्छी वर्षा होती है। वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि नौतपा के दौरान बारिश हो जाए तो आने वाले समय में वर्षा में कमी देखी जा सकती है। 25 मई से 2 जून तक नौतपा का प्रभाव सबसे अधिक रहने की संभावना है, इसलिए तेज धूप और भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।

मानसून का गर्भकाल

नौतपा को मानसून का गर्भकाल भी कहा जाता है। मान्यता है कि सूर्य की तीव्र गर्मी और रोहिणी नक्षत्र के जल तत्व के प्रभाव से मानसून की प्रक्रिया मजबूत होती है। इसी दौरान चंद्रमा भी नौ नक्षत्रों में भ्रमण करता है, जो मौसम परिवर्तन का संकेत माना जाता है।

नौतपा में क्या करें और क्या न करें?

क्या करें:

नौतपा के दौरान सूर्य देव की उपासना करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
प्रतिदिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
सूर्य देव को जल अर्पित करें। जल में थोड़ा चावल, गुड़, रोली या लाल गुलाब का फूल डालकर तांबे के लोटे से अर्घ्य दें और सूर्य मंत्रों का जप करें।
जरूरतमंद लोगों को शरबत, सत्तू, पानी का घड़ा, पंखे और मौसमी सब्जियों का दान करें।
लोगों को पानी पिलाना भी अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
इस दौरान सात्विक और ताजा भोजन करना लाभकारी माना जाता है।

क्या न करें:

तामसिक भोजन से परहेज करें।
बासी भोजन खाने से बचें।
अत्यधिक धूप में बिना आवश्यकता बाहर निकलने से बचें और शरीर को हाइड्रेट रखें।

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