
Hukamnama 26 May 2026: बिलावलुमहला ३ ॥ पूरेगुर तेवडिआई पाई ॥ अचिंत नामुवसिआ मनि आई ॥ हउमैमाइआ सबदि जलाई ॥ दरि साचैगुर तेसोभा पाई ॥१॥ जगदीस सेवउ मैअवरुन काजा ॥ अनदिनुअनदुहोवैमनि मेरैगुरमुखि मागउ तेरा नामुनिवाजा ॥१॥ रहाउ ॥ मन की परतीति मन ते पाई ॥ पूरेगुर तेसबदि बुझाई ॥ जीवण मरणुको समसरि वेखै॥ बहुड़ि न मरैना जमुपेखै॥२॥
Hukamnama 26 May 2026 अर्थ: जिस मनुख ने पूरे गुरु से वडआई-इज्जत प्राप्त कर ली उस केमन में वः हरी नाम आ बस्ता है जो हरेक प्रकार का फिकर-भ्रम दूर कर देता है। जिस मनुख ने गुरु के शबद के द्वारा (अपने अंदर से) माया के कारन पैदा हुए हौमेय (अहंकार) जल लिया, उस ने गुरु की कृपा से सदा कायम रहने वाले परमात्मा के दर पर शोभा पा ली ॥१॥ हे जगत के मालिक प्रभु! (कृपा करो) मैं (तुम्हारा नाम) सुमिरन करता रहूँ, (इस से अच्छा) मुझे कोई और काम ना लगे। (हे प्रभु!) गुरु की शरण आ के (आत्मिक आनंद की) बख्शीश करने वाला तेरा नाम मांगता हूँ (ता की) मेरे मन में (उस नाम की बरकत से ) हर समय आनंद बना रहे॥१॥रहाउ॥ उस मनुख ने अपने अंदर से अपने मन के लिए श्रद्धा-विशवास की डाट खोज ली है (यह श्रद्धा की परमात्मा सारे जगत के एक सामान व्यापक है), जिस ने पूरे गुरु से (उस के) शब्द के द्वारा (आत्मिक जीवन की) सूझ प्राप्त कर ली। जो भी मनुख सारी उम्र प्रभु को (सृष्टि में) एक सामान (बस्ता) देखता है, उस को कभी आत्मिक मौत नहीं आती, उस की तरफ यमराज कभी नहीं देखता॥२॥