Last Updated: September 21, 2026

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हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 30 मई 2026

May 30, 2026

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 30 मई 2026

Hukamnama: धनासरी महला ५ ॥ त्रिपति भई सचु भोजनु खाइआ ॥ मनि तनि रसना नामु धिआइआ ॥१॥ जीवना हरि जीवना ॥ जीवनु हरि जपि साधसंगि ॥१॥ रहाउ ॥ अनिक प्रकारी बसत्र ओढाए ॥ अनदिनु कीरतनु हरि गुन गाए ॥२॥ हसती रथ असु असवारी ॥ हरि का मारगु रिदै निहारी ॥३॥ मन तन अंतरि चरन धिआइआ ॥ हरि सुख निधान नानक दासि पाइआ ॥४॥२॥५६॥

अर्थ: हे भाई! साध-संगति में (बैठ के) परमात्मा का नाम जपा करो- यही है असल जीवन, यही है असल जिंदगी।1। रहाउ।हे भाई! जिस मनुष्य ने अपने मन में, हृदय में, जीभ से परमात्मा का नाम सिमरना शुरू कर दिया, जिसने सदा-स्थिर हरी नाम (की) खुराक खानी शुरू कर दी उसको (माया की तृष्णा की ओर से) शांति आ जाती है।1।जो मनुष्य हर वक्त परमात्मा की सिफत सालाह करता है, प्रभु के गुण गाता है, उसने (मानो) कई किस्मों के (रंग-बिरंगे) कपड़े पहन लिए हैं (और वह इन सुंदर पोशाकों का आनंद ले रहा है)।2।हे भाई! जो मनुष्य अपने हृदय में परमात्मा के मिलाप का राह ताकता रहता है, वह (जैसे) हाथी, रथों, घोड़ों की सवारी (के सुख मजे ले रहा है)।3।हे नानक! जिस मनुष्य ने अपने मन में हृदय में परमात्मा के चरणों का ध्यान धरना शुरू कर दिया है, उस दास ने सुखों के खजाने प्रभु को पा लिया है।4।2।56।

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