चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की आज दिल्ली में पार्टी हाईकमान के साथ महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। बता दें कि पिछले चार दिनों में यह दूसरी उच्चस्तरीय बैठक है, जिससे राज्य की राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बैठक में पंजाब मामलों के प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी मौजूद रहेंगे।
सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य फोकस आगामी चुनावों की तैयारी और पार्टी में बेहतर समन्वय स्थापित करना रहेगा। हालांकि पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर विभिन्न अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल नेतृत्व परिवर्तन एजेंडे में शामिल नहीं है।
पिछली बैठक के बाद बढ़ी थीं चर्चाएं
29 मई को दिल्ली में हुई बैठक के दौरान पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा के बीच बैठक छोड़कर जाने की घटना ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया था। हालांकि बाद में भूपेश बघेल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि बाजवा ने अपनी बात रखने के बाद पहले से निर्धारित कार्यक्रम के कारण बैठक छोड़ी थी। स्वयं बाजवा ने भी मीडिया में चल रही अटकलों को निराधार बताया था।
अध्यक्ष पद को लेकर चर्चाएं जारी
भले ही कांग्रेस नेतृत्व किसी बदलाव से इनकार कर रहा हो, लेकिन पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चर्चाएं लगातार बनी हुई हैं। राजनीतिक गलियारों में पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला का नाम संभावित विकल्प के रूप में लिया जा रहा है। उन्हें ऐसा नेता माना जाता है जो विभिन्न गुटों के बीच संतुलन बनाने की क्षमता रखते हैं।
इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को भी संगठन में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला नेता माना जा रहा है। हालांकि वे अध्यक्ष पद की दौड़ में सक्रिय नहीं दिख रहे, लेकिन पार्टी के अंदर उन्हें एक महत्वपूर्ण रणनीतिक चेहरा माना जाता है। वहीं परगट सिंह और राणा गुरजीत सिंह के नाम भी समय-समय पर चर्चा में आते रहे हैं।
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गुटबाजी खत्म करना बड़ी चुनौती
पंजाब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन के भीतर मौजूद गुटबाजी को समाप्त कर एकजुटता कायम करना है। पार्टी नेतृत्व लगातार नेताओं को सामूहिक रूप से काम करने का संदेश देता रहा है। कांग्रेस पहले ही संकेत दे चुकी है कि 2027 का विधानसभा चुनाव सामूहिक नेतृत्व के तहत लड़ा जाएगा।
जनवरी में हुई समीक्षा बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने नेताओं को सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की नसीहत दी थी। वहीं हाल ही में भूपेश बघेल ने भी स्पष्ट किया था कि प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व को लेकर फिलहाल कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है।