Last Updated: September 25, 2026

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भारतीय क्रिकेट टीम में नए कोच की एंट्री, साईराज बहुतुले को मिली ये अहम जिम्मेदारी

June 2, 2026

भारतीय क्रिकेट टीम में नए कोच की एंट्री, साईराज बहुतुले को मिली ये अहम जिम्मेदारी

मुंबई: पूर्व भारतीय ऑलराउंडर साईराज बहुतुले भारत की सीनियर मेंस क्रिकेट टीम के स्पिन बॉलिंग कोच नियुक्त किए गए हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने मंगलवार को इसकी घोषणा की। बहुतुले सभी फॉर्मेट में भारत के अगली पीढ़ी के स्पिनर्स का मार्गदर्शन करेंगे।

बीसीसीआई का बयान 

बीसीसीआई की तरफ से जारी बयान में कहा गया, “भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि साईराज बहुतुले को भारतीय क्रिकेट टीम (सीनियर पुरुष) का स्पिन बॉलिंग कोच नियुक्त किया गया है।” घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कोचिंग का अच्छा-खासा अनुभव हासिल करने के बाद बहुतुले इस भूमिका में आए हैं।

स्पिन बॉलिंग कोच नियुक्त होना मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान

अपनी नियुक्ति पर खुशी जताते हुए बहुतुले ने कहा, “भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम का स्पिन बॉलिंग कोच नियुक्त होना मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है। बतौर खिलाड़ी भारत का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए बहुत गर्व की बात थी। अब कोचिंग की भूमिका में भारतीय क्रिकेट में एक बार फिर योगदान देने का मौका मिलना बहुत खास है। मैं खिलाड़ियों के साथ काम करने और सभी फॉर्मेट में टीम की बेहतरीन प्रदर्शन की कोशिशों में उनका साथ देने के लिए उत्सुक हूं।” भारत के लिए 2 टेस्ट और 8 वनडे मैच खेल चुके बहुतुले ने 188 फर्स्ट क्लास मुकाबलों में 31.83 की औसत के साथ 6,176 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से 9 शतक और 26 अर्धशतक निकले। फर्स्ट क्लास में उनके नाम 630 विकेट भी हैं।

IPL में कई टीमों के लिए निभाई बॉलिंग कोच की भूमिका

रिटायर होने के बाद, बहुतुले भारतीय क्रिकेट के सबसे सम्मानित कोच में से एक बने। उन्होंने विदर्भ, केरल, गुजरात और बंगाल की टीमों के हेड कोच के तौर पर काम किया। इसके अलावा, राजस्थान रॉयल्स और पंजाब किंग्स जैसी आईपीएल टीमों के लिए स्पिन बॉलिंग कोच की भूमिका भी निभाई। बहुतुले ने कई मौकों पर इंडिया ‘ए’ और सीनियर पुरुष टीम के साथ एक स्पेशलिस्ट बॉलिंग कोच के तौर पर भी करीब से काम किया है। साल 2021 से 2024 तक, वह बीसीसीआई की नेशनल क्रिकेट एकेडमी (जिसे अब ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के नाम से जाना जाता है) के कोचिंग स्टाफ का एक अहम हिस्सा थे, जहां उन्होंने उभरती हुई प्रतिभाओं को निखारने में मदद की।

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