Last Updated: September 25, 2026

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नई विकास विचारधारा: आधुनिकीकरण का अलग मॉडल

June 4, 2026

नई विकास विचारधारा: आधुनिकीकरण का अलग मॉडल

पश्चिमी देश पारंपरिक विकास मॉडल पर चलते-चलते अब कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। विकास के लाभ सीमित होते जा रहे हैं और धन असमानता तथा आर्थिक कठिनाइयों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। इसके विपरीत, 140 करोड़ आबादी वाले चीन ने अपने आधुनिकीकरण के रास्ते में “पहले प्रदूषण फैलाओ, बाद में सफाई करो” और “अमीर अल्पसंख्यक, गरीब बहुसंख्यक” जैसी गलतियों से बचते हुए अलग दिशा अपनाई है। ऐसे में सवाल उठता है कि चीन के आधुनिकीकरण की दिशा में आखिर बदलाव क्या है? इसका जवाब पांच प्रमुख शब्दों में छिपा है: नवाचार, समन्वय, हरित विकास, खुलापन और साझाकरण। यही नई विकास विचारधारा चीन के विकास पथ को गहराई से बदल रही है।

वर्ष 2015 में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने चीन के विकास को दिशा देने के लिए नई विकास विचारधारा का प्रस्ताव रखा। इस विचारधारा का आधार नवाचार, समन्वय, हरित विकास, खुलापन और साझाकरण है। शी चिनफिंग के आर्थिक विचारों के प्रमुख तत्व के रूप में यह अवधारणा अपनी शुरुआत से ही चीन की हर पंचवर्षीय योजना का अहम हिस्सा रही है। इसे “चीन के आधुनिकीकरण की समग्र प्रक्रिया में गहरा परिवर्तन” माना जाता है।

इस नई विकास विचारधारा की सबसे बड़ी विशेषता उसका दृष्टिकोण है। पारंपरिक विकास मॉडल आमतौर पर केवल जीडीपी वृद्धि पर जोर देते हैं, जबकि नई विकास विचारधारा पांच आयामों— नवाचार, समन्वय, हरित विकास, खुलापन और साझाकरण के जरिए विकास में मौजूद संरचनात्मक समस्याओं का समाधान करने की कोशिश करती है। इसमें नवाचार को प्रमुख प्रेरक शक्ति माना गया है, समन्वय को विकास की आंतरिक आवश्यकता, हरित विकास को आवश्यक शर्त, खुलापन को अनिवार्य रास्ता और साझाकरण को मूल उद्देश्य के रूप में देखा गया है। ये पांचों आयाम मिलकर भविष्य के बेहतर विकास की दिशा तय करते हैं।

नई विकास विचारधारा की दूसरी विशेषता उसका विकास मार्ग है। पारंपरिक मॉडल या तो पश्चिमी देशों के पुराने रास्ते पर चलते हैं, जहां पहले प्रदूषण फैलता है और बाद में सफाई की जाती है, या फिर वे संसाधनों और श्रम के बड़े पैमाने पर निवेश पर निर्भर रहते हैं। इसके विपरीत, नई विकास विचारधारा विकास की प्रेरक शक्ति को पूरी तरह बदल देती है और कारक-आधारित मॉडल से नवाचार-आधारित मॉडल की ओर बढ़ती है। इसी कारण, 2012 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद से वैश्विक नवाचार सूचकांक में चीन की रैंकिंग 34वें स्थान से बढ़कर 10वें स्थान तक पहुंच गई। चीन ने इस दौरान “अनुसरण” देश से “अग्रणी” देश बनने की दिशा में महत्वपूर्ण छलांग लगाई है।

नई विकास विचारधारा की तीसरी विशेषता उसके लक्ष्य में दिखाई देती है। पारंपरिक विकास मॉडल अक्सर पूंजी केंद्रित होते हैं, जिनमें धन कुछ लोगों तक सीमित रह जाता है। इसके विपरीत, नई विकास विचारधारा जन-केंद्रित सोच पर आधारित है। इसका अंतिम लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी लोग विकास के लाभों में भागीदारी करें और धीरे-धीरे साझा समृद्धि हासिल की जा सके। इसी सोच के तहत विकास के लाभों को “कुछ लोगों के फायदे” से आगे बढ़ाकर “सभी के साझाकरण” की दिशा में ले जाया गया है।

नई विकास विचारधारा के प्रभाव में चीन ने ऐसा विकास मार्ग अपनाया है, जो पारंपरिक मॉडलों से अलग है। यह अधिक व्यवस्थित, अधिक टिकाऊ और अधिक न्यायसंगत विकास का रास्ता माना जा रहा है। इसने न केवल विकास की सोच को नया रूप दिया है, बल्कि दुनिया के सामने विकास का एक नया विकल्प भी पेश किया है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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